Monthly Archives: March 2017
निःसाधनभाव
महाप्रभूजी के वचन है “निजेच्छातः करिष्यति” । इस निजेच्छा का मतलब क्या? जैसे एक मछली को टब में छोड़ देते हैं तब वह उस टब में इस कोने से उस कोने तक फिरने में स्वतन्त्र है, तलमे रहे या ऊपर तैरे, स्थिर रहे या दोड़ा दोड़ करे सब उसकी इच्छा पर निर्भर है, यह है जीवकी इच्छा, उसकी स्वतन्त्रता।किन्तु वह कितना भी प्रयत्न करे, पुरूषार्थ करे उस टबके बाहर नहीं निकलसकती, यह है प्रभू की इच्छा। माने जैसे भगवान के षडैश्वर्य हैं, वैसे जीवमे भी ऐश्वर्य है, भले वो समुद्रके सामने बूंद जितनो ही हो।
दूसरी बात लौकिक कामों में हम सतत प्रयास करते हैं।बच्चे को स्कूलमें दाखिल करना हो तो, स्कूल का स्तर कैसा है क्या पढाया जाता है, वाहनकी सुविधा है या नहीं, फीस कितनी है, सब बातों का विचार करते हैं, बड़े हो गये तो, कौनसा करियर चुने, एम, बी, ए, का क्या स्कोप है, आई, टी, का क्या स्कोप है, सी, ए, का क्या स्कोप है? बच्चे की रुची किसमें है, सब विचार करते हैं।शादी ब्याहके लिए कितनी छानबीन करते हैं।तब यह नहीं सोचते हैं कि प्रभूकी इच्छा होयगी तो हो जायेगा। विडम्बना है कि, जब भी आध्यात्म की बात धर्म की बात, साधना की बातआती है, हमें याद आ जाताहै कि प्रभू की इच्छा ही नहीं है, मैं क्या कर सकता हूं?
तीसरी बात- निःसाधनभाव, जो पुष्टिमार्ग की महत्वपूर्ण थीम है।इसका मतलब है हम यथासाध्य जो कुछभी करते हैं, उसमें कृत्तत्वाभिमानको त्याग कर यह भाव रखते हैं कि मैंने कुछ नहीं किया, सब प्रभूने मुझसे करवाया है, हालांकि करते हम ही हैं, इसीका नाम निःसाधनभाव है।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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હોરીખેલ
मिली दियौ है सखी को भेष अपुने लाल को |
मिली गावत चही है धमार गजगति चाल सों ||
वृषभान सुता नन्दलाल कों हो दियौ है सखी को भेष |
सारी सुरंग सुहाबनी हो नैननि काजर रेख ||
जसुमति आगै राधिका हो कहती है बात बिचारि |
श्याम सुन्दर के कारने हम लाई है एकु नारि ||
जसुमति बुझे राधिका हो कहाँ की कन्या होय |
कहा नाम या बाल कौ हौ मै सुनी जानो सोई ||
नन्द महर की यह सुता हो मोहनी जाकौ नाऊँ |
महारावर साँची कहौ हो गोकुल जाकौ गाऊँ ||
यह रावर मुसिकाइ कै हो जब जान्यौ या भेव |
तन मन धन सब नोछावरि हो बलिहारी या देख ||
फगुवा मांगै राधिका हो महा रावर गहि धाइ |
अब भले तुम छूटी हो मोहे फगुवा देहु मंगाई ||
फगुवा दियौ जसुमति हो पान फूल पकवान |
फगुवा लिनै राधिका हो भए सकल कल्यान ||
लाल गुलाल उड़ाव ही गगन लौ सब छाई |
एकु एकनु अंक भरै हो सोभा कही न जाइ ||
रस बाढ्यौ गोपिका हो खेलती झुमक चारि |
एकु सखी मिली एकु सौ देती है होरी की गारी ||
पुहुप सुरंग सुहाबनो हो फुले फाले सुबास |
जसोदा नन्दन राधिका हो खेले रंग विलास ||
ऐसी सोभा फागु की हो मोपै बरनी न जाइ |
रसिक सुन्दर लाल पै हो निरखि सदां बलि जाइ ||
Filed under હોળી ના રસિયા
શ્યામ ની ફેસબુક માં આવવા ની ભૂલ
શ્યામ, તમે ફેસબુકમાં આવો તો
પાંચ હજાર ગોપીઓને રાખશો,શયા
બીજાનું શું?
ક્લોઝ-ફ્રેન્ડ તરીકે તમે રાધાનું
નામ આપશો,
તો પછી જીવનભર ઝંખતી
મીરાંનું શું?
ચેટ કરશો તો
સૂકાશે વાંસળી ને મુરજાશે મોરપિચ્છ..
જમનાને તીર જાશો તો
રીસાશે રાધા ને કરશે બ્લોક
પછી તમે કદી નહિ કહો:
‘યુગે યુગે આવીશ આ લોક !’
અધરાતે આવશે મીરાંનો મેસેજ
તો સત્યભામાને પડશે શક
તમે કોને જઈ કહેશો આ દખ ?
દ્રૌપદીને નહિ કરો જો ટેગ
તો માગશે લીરો બાંધ્યાનું મૂલ
ને શ્યામ તમને સમજાશે..
શ્યામ, તમે ફેસબુકમાં આવો તો
પાંચ હજાર ગોપીઓને રાખશો,
બીજાનું શું?
ક્લોઝ-ફ્રેન્ડ તરીકે તમે રાધાનું
નામ આપશો,
તો પછી જીવનભર ઝંખતી
મીરાંનું શું?
ચેટ કરશો તો
સૂકાશે વાંસળી ને મુરજાશે મોરપિચ્છ..
જમનાને તીર જાશો તો
રીસાશે રાધા ને કરશે બ્લોક
પછી તમે કદી નહિ કહો:
‘યુગે યુગે આવીશ આ લોક !’
અધરાતે આવશે મીરાંનો મેસેજ
તો સત્યભામાને પડશે શક
તમે કોને જઈ કહેશો આ દખ ?
દ્રૌપદીને નહિ કરો જો ટેગ
તો માગશે લીરો બાંધ્યાનું મૂલ
ને શ્યામ તમને સમજાશે..
ફેસબુકમાં આવવાની ભૂલ !!
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