कॉकरोचका उद्गम स्थान कहाँ है?
कॉकरोच के बाद क्या?
कॉकरोचके बाद क्या किस की बारी है?
कॉकरोचसे पहेले कौन था?
उससे भी पहेले कौन था?
डीप स्टेट उवाचः
अरे भैया, हम आंतर् राष्ट्रीय कक्षाके जनजागृतिके नाम पर विश्वके देशोंमें सत्ता परिवर्तनका काम करते है. सफलता पाना हमारा ध्येय है. हम साधन शुध्धिके सिध्धांतमें मानते नहीं है. हम एक के बाद एक हथकंडे अपनाते है. वैसे तो हमारे पिताजी “अंकल साम” है. पर “हम डीप स्टेट” शुभनामसे प्रतिष्ठित है.
पृथ्विके अनेक देशोंमें हम हस्तक्षेप करते है, क्यूँकि हम सबके चाचा (अंकल) है. वर्तमानमें हमने हमारा कार्यक्षेत्र केवल पृथ्विको ही रक्खा है. क्या करे !! यह हमारी शक्तिकी सीमा है. वैसे हमारे लोग, विश्वके अन्य ग्रहोंके बुद्धिमान सजीवोंको पराजित करनेकी फिलम बनाते है. लेकिन वह टीम अलग है.
कॉकरोचके पहेले जेन ज़ी नाम था.
मतलब “जनरेशन झेड”,
मतलब “अंतिम जनरेशन”, क्यूंकि झेड अंग्रेजी मूळाक्षरका अंतिम मूळाक्षर है.
मतलब “युवा जनरेशन”,
मतलब “नवयुवा जनरेशन”,
“जेन ज़ी” से हमने कई देशोंमें सत्तापरिवर्तन करवाया ऐसा हम मानते है और मनवाते है. और ऐसी हवा फैलाते है. अपनी हवा फैलाना इस डीजीटल युगमें उपयोगी शस्त्र भी है. क्या करें !! इस शस्त्रका उपयोग हमारे विरोधी भी करते है. लेकिन वे लोग संगठित नहीं है इस लिये हम, अंक गणितके सहारे, “उनको परास्त किया” ऐसी हवा फैलाते है.
यह कॉकरोच जनता पार्टी क्या है?
अरे ! आपको पता नहीं? वह तो हम ही है. अंक गणित के शस्त्रसे, हमने लाखों सदस्य बनाये है. जूठ हमारा सबसे बडा शस्त्र है. यह हमने गोब्बेल्ससे शिखा है, लेकिन हमने उसको शर्मिंदा किया . हमने “जूठ”का क्षेत्र अनंत कर दिया है.
छोडो इन बातोंको. …
हमारा टार्जेट, भारतके सर्व क्षेत्रीय विकासको रोकना है. जब भारतमें वंशीय शासन था तब हमें कोई समस्या नहीं थी. प्राकृतिक संतुलन वाला हमारा शस्त्र हमे मदद करता था. वंशवादी हरेक शासक अपने ही अपकृत्योंमें उलज़ा रहता था.
नहेरु अपनको समाजवादी मानता था. रुस और चीनने नहेरुका अति बहुमान किया. चीनके चरित्र को तो हम जानते ही है. उसने भारत पर आक्रमण कर दिया और आसान जीत हांसिल करके ९१ लाख चोरस मील भारतकी भूमि पर कब्जा कर लिया.
वैसे तो उस समय कोंग्रेस संगठन पर नहेरुका कब्जा था. और अधिकतर समाचार माध्यमों पर भी नहेरुका प्रभाव था. चीनसे भारतकी पराजय हुई उसके कारण नहेरु जनतामें अप्रिय हो गया. नहेरु एक नौटंकीबाज था. महात्मा गांधीके आगे भी उसने १९४६में नौटंकी किया था. नहेरुके लिये तो भारतकी विशाल अनपढ जनताको आसानीसे उल्लु बनाना आसान था. “दुश्मनने हमें दगा दिया”, “जरा आँखमें भरलो पानी …”, “हम भारतकी भूमि को वापिस लिये बिना चैनसे बैठेंगे नहीं”, देशको मजबूत करनेके लिये, पक्षके संगठनको मजबुत करना आवश्यक है.
नहेरुने एक “सींडीकेट” बनायी. सींडीकेटके सदस्योंको समज़ाया कि हमें साथ ही तैरना है या साथ ही मरना है. मेरा अनुगामी मेरी सु(कु)-पूत्रीको होना है ताकि मेरे कुकर्म गुप्त रहे.
नहेरु कामराज प्लान लाये और उस प्लानसे क्या क्या किया वह हमे मालुम है. जनताने नहेरुको मीश्र प्रतिभाव दिया. बात लंबी है. … नहेरु घुडसवारी करते करते आराम और चैनसे मर भी गये.
चाचा (अंकल साम) को लगा कि यह हंगामी प्रधानमंत्री, के समयमें भारतको हराना और फिर बादमें तोडना आसान रहेगा. चाचाने पाकिस्तानको उकसाया. और पाकिस्तानने भारत पर आक्रमण किया. मीश्र हारजीत हुई. अंकल सामका गणित फेल हुआ. क्यूँकि भारतकी सेनाने कुछ महत्वके पाकिस्तानके स्थानोंपर कब्जा किया था,
“चाचा साम”ने रुसकी मदद लेके भारत और पाकिस्तानके बीच संधि करवाया. संधिके अंतर्गत सभी जीते हुए स्थान दोनोंने एकदुसरेको परत किया. इसके कारण (!!) शास्त्रीजी की हृदय बंद पडनेसे मृत्यु हुई. और रुसकी धरती पर यह मृत्यु हुई थी. न रहा बांस और न रही बांसुरी जैसा हाल हुआ.
नहेरु-सूता इंदिरा, प्रधान मंत्री हुई. लेकिन, प्रधान मंत्री बनना, और, सुचारु रुपसे शासन करना, भीन्न भीन्न बात है. १९६७के चूनावमें विपक्ष को गणनात्मक बैठकें मिली. कोंग्रेसका विभाजन हुआ. इंदिराने साम्यवादीओंका सहारा लेके अपना शासन चालु रक्खा. समाजवाद के नाम पर और समाचार माध्यमोंके सहयोगसे, इंदिरा गांधीको जनवरी १९७१में हुए आम चूनावमें विजय मिली.
इससे पूर्व एक और घटना घटी. यह घटना पाकिस्तानमे १९७०में दिसंबरमें घटी थी. “अवामी लीग” पक्षने बहुमत हांसिल किया था. लेकिन पश्चिम पाकिस्तानने आंदोलन द्वारा सत्ताके हस्तांतरणका इन्कार किया. बंगला देशमें (पूर्व पाकिस्तानमें) स्वतंत्र बंगला देशका आंदोलन तीव्रतासे शुरु हुआ. पूर्वपाकिस्तानके बिहारी मुस्लिम कहेजाने वाले मुस्लिमोंका भारतमें आना भी बडे पैमाने पर शुरु हुआ. पूर्व पाकिस्तानस्थित हिंदु भी, पाकिस्तानी सेना की प्रताडनासे भारतामें आने लगे थे. भारतमें ऐसे शरणार्थीओका आगमन असीमित बनने लगा.
“पूर्व पाकिस्तानको आज़ाद करना” इस बात पर चाचा साम (अंकल साम) तयार ही थे. लेकिन इसके लिये उनको स्वयंको क्रेडिट लेना था. भारतकी सेनाने पूर्वपाकिस्तानकी मूक्तिवाहिनीको भरपूर सहयोग दिया. और बंग्लादेश बन भी गया. और क्रेडिट भारतकी सेनाको मिली. यह क्रेडिट इंदिरा गांधीने अपने नाम पर कर दी. और १९७२में भारतके राज्योंकी विधान सभाओका आम चूनाव घोषित करके जीत भी हांसिल करली.
अब इन्दिरा कोंग्रेस मतलब कोंग्रेस (आइ) मतलब कोंगी मजबुत पक्ष बन गया. कोम्युनीष्टोके सहयोगकी आवश्यकता नही थी. लेकिन सरकार आश्रित संस्थाओमें साम्यवादी विचार धारा प्रज्वलित रक्खा.
इंदिरा गांधीने जो किर्ती अपने नाम कर दी थी उसकी वह हक्कदार नहीं थी.
जिस कर्मफलका यदि कोई व्यक्ति हकदार नहीं है फिर भी वह उसको अपने नाम कर देता है तो उसका विनाशक कर्म फल उसको भूगतना ही पडता है.
इंदिराने अनेक कुकर्म किये थे. और बंगलादेशकी रचनाके बाद एक साल तक पाकिस्तानी युध्धकैदीयोंको बंग्लादेशके हवाले करनेके स्थान पर, भारतमें रक्खा और उनको आदरपूर्वक खिलाया पिलाया. उसके अतिरिक्त, इंदिरा, जनाब भूट्टोकी नौटंकीसे पीधल गयीं और पश्चिम पाकिस्तानकी सब भूमि जो भारतीय सेनाने विजयसे / बलिदानसे उपार्जित की थी जिसमें पीओकेकी भूमि (जिसके उपर तो भारतका हक था) वह भी पाकिस्तानको परत कर दी. पाकिस्तान अपने पास रहे ४०० युद्ध भारतीय कैदीयोंको भारतको वापस करें उसके पूर्व ही पाकिस्तानके ९३००० युद्ध कैदीयोंको भी वापिस कर दिया. इंदिराने भारतकी अभूतपूर्व विजयको घोर पराजयमें परिवर्तित कर दी. संसदमें और राज्योंमे इंदिराका बहुमत था. जनता लाचार थी.
लेकिन यह तो कर्मफल था. इंदिरा जिस के लिये हकदार नहीं थी उसके लिये उसने अपना हक जमाया और भारतनी जनताने अपनी विवेक बुद्धिका उपयोग न करके अयोग्य व्यक्ति/पक्षका चयन किया तो उसको भी अपना कर्म फल मिला. क्यूं कि इंदिराने बादमें आपात्कालका हंटर चलाया.
फिर भी यह तो भारत है. जिसके उपर महाकालकी कृपा है.
सच्चे अर्थमें भारतमें जेन ज़ी [जनरेशन झेड (युवा आंदोलन)] गुजरातमें “नवनिर्माण” नामसे आरंभ हुआ. और १६४की विधान सभामें १४० सदस्योंवाली कोंग्रेसके सामने यह जन-अंदोलन शुरु हुआ. इंदिराको विधानसभा भंग करना पडा. यह आंदोलन को गांधीवादी (सर्वोदयवादी) नेताओंका (जय प्रकाश नारायण, देशपांडे, … आदि नेतागणका) सक्रीय समर्थन और सहयोग मिला और यह आंदोलन देशव्यापी बना.
इंदिराने आपात्काल लगाया. कोंगीका यह आपात्काल अपने ही भारसे तूट पडा और सर्वशक्तिमान कही जाने वाली इंदिरा १९७७के आम चूनावमें स्वयं भी अपने ही चूनावक्षेत्रमें परास्त हुई.
लेकिन “चाचा साम” इस घटनाका श्रेय नहीं ले पाये. क्यूँकि अंकल साम हमेशा भारतकी जनताको समज़नेमें कमजोर पडते है. कोशिस तो की थी. लेकिन जयप्रकाश नारायण गुटके सामने अंकल साम, विफल रहे.
इंदिराने विपक्षमे विभाजन करवाके मोरारजी देसाईकी सरकारको गीराके १९८०में फिरसे सत्ता प्राप्त की. कुकर्म लगातार करते रहेना नहेरुवीयनोंका चरित्र है. इंदिरा गांधी अपने कुकर्मोंसे मरी. इंदिरा गांधीके लिये झाडु तक लगानेको तयार फकरुद्दीन अली अहेमदने इंदिराके पूत्र राजिव गांधीका राज्याभिषेक किया. फिर राजकीय अस्थिरताका सिलसिला शुरु हुआ. कोंगीपक्ष की गाडीको पटरी पर लानेकी कोशिस नरसिंह रावने की. लेकिन कोंगीके वंशवादी नेतागण को यह पसंद नहीं था. देशके उपर एकाधिकार शासन करना तो उनके ही वंशका जन्मजात हक है. यदि कोंगी स्थापित प्रधानमंत्री नरसिंह राव, अपने हिसाबसे शासन करने लगे थे. उनको जनताकी नजरसे गिरानेके लिये वंशवाद परस्त नेतागणने फरजी वीडीयो क्लीप प्रसारित क्या.
“चाचा साम” को भी नहेरुवीयनोके नंबर वन सत्ता स्थानोंसे कोई समस्या नहीं थी. पडोशी देशोंको भी जैसे कि चीन. चीन हस्तक ७१००० चोरस मील भारतकी भूमि वापस लेनेकी कोंगीके आदि नेता नहेरुकी शपथ को पूर्ण करनेकी बात तो छोडो, उसके लिये व्यावहारिक मांग भी नहीं रक्खी. पाकिस्तान की नेतागीरी तो नहेरुवीयनोंसे संतूष्ट थी.
लेकिन २०१४में आया नरेंद्र मोदी
चाचा साम परेशान होने लगे. उनको लगा “साला !! यह वर्नाक्युलर भाषामें पढा हुआ चायवाला प्रधान मंत्री कहाँ से आया !! और वह भी “भारतहित सर्व प्रथम” ऐसा बोलनेवाला और आचरण भी करनेवाला.
“यु. एस. ए. प्रथम” ऐसा हर हालतमें बोलनेका हक्क तो केवल हमारा ही है. अंकल सामने अपनी भूगर्भ सेनाको आदेश दे ही दिया कि भारत पर अपना आक्रमण तेज करो. चीन पर तो हम नियमन रख सकते हैं क्यों कि वह तो साम्यवादी है और उसके “नंबर वन” नेताकी चोटी पकडेंगे तो चीन पूरा नियमनमें आ जाता है. लेकिन भारत तो साला जनतंत्रवाला देश है जबतक वंशवादी पक्ष सत्ता पर था, तब तक तो हमें कुछ समस्या नहीं थी. लेकिन २०१४से जब यह चायवाला प्रधान मंत्री बना तबसे भारतमें सच्चे अर्थमें जन-तंत्र आया है और यह बात हमें पसंद नहीं है.
अंकल सामको यह भी लगता है कि यह चायवालेने तो सच्चा इतिहास पढानेकी छूट दे दी है. भारतकी आम जनताकी तो अपने देशपर अभिमान करने वाली बन गई है. तो हमें भी कुछ ऐसी टीवी चेनलें बनाना पडेगा कि भारतके प्राचीन इतिहासमें कुछ गडबडी उत्पन्न करें.
लेकिन इस चायवालेको कैसे हराया जाय?
जब कोई देशमें जनतंत्रमें माननेवाला नेता सर्वोच्च पद पर आता है तो वह विकास तो करता ही है लेकिन अपने जैसे अनेक नेता भी उत्पन्न करता है. इस खतरेको नज़्ररअंदाज नहीं किया जा सकता. यह चायवालेका तो स्वप्न है विश्वका गुरु बननेका, एवं भारतको विकासित राष्ट्र नंबर वन बनानेका. और वह भी २०४७ तकके अंतरालमें. और भारतमें तो आम जनता मानती भी है कि मोदी है तो मुमकिन है. और यह बातकी अनुभूति भी की है.
“अंकल साम”की भूगर्भ सेनाको पता तो है कि कोई भी देश जयचंद विहीन नहीं होता है. और आम जनता “हवा” से हवा चलती है. भूगर्भ सेनाने सोचा, हवा उत्पन्न करनेमें कुछ महामानव, ख्यातनाम, स्वयंको ‘जरा हटके’ केटेगीरी वाले, स्वयंको सुज्ञ समज़ने वाले, पूर्वग्रहयुक्त लालची … ऐसे लोगोंको हाथ पर लो. उनको महानता प्रदान करो. इनमें समाचार माध्यमोंके कोलमीस्ट एवं संचालकोंको भी हाथ पर लो.
लेकिन इसका पता कैसे करें?
“ईंन्डीयन नेशनल डेवेलपमेंट इनक्ल्युज़ीव एलायन्स” नामका एक गठबंधन है. इसको ये लोग कैसे लिखते है उसका पता करो.
सच्ची लिखावट I.N.D.I. ALLIANCE है. यानी कि इंडी एलायन्स है.
जो व्यक्ति/समाचार पत्रका कटारीया (कोलमीस्ट) ईन्डीया एलायन्स, या ईंडीया गठबंधन लिखता है वह हमारा चहिता बननेके लिये तरस रहा है. ऐसा समज़ लो.
“गुलाब” का क्या अर्थ होता है. गुल = पुष्प, आब = पानी. यानी कि पुष्पका पानी. लेकिन यह तो एक विशिष्ठ पुष्पका नाम है
इस पुष्पको पानीमें डालो. तो उस पानीको क्या बोलते है? गुलाब-जल.
क्या आप उसको “गुलाबजल पानी” कहोगे? नहीं जी. क्यूँ कि तब तो “गुलाबजल जल” हो गया. भाषा शास्त्री बोलेगा अरे भाई तुम अनपढ हो क्या हूँ?
लेकिन चहिता बनना है तो? ऐसा लिखनेवाले जयचंद मिल ही जायेंगे. अरे भाई महात्मा गांधीके चाहने वालोंमेंसे भी ऐसे मिल जायेंगे.
भूगर्भ सेना बोली “हाउ इज़ ध जोश”
फिर क्या हुआ … ?
हिंदुओंको विभजित करो …
ज्ञातिवाद चलाया. … फेल हो गया,
हम भीन्न है (मा, माटी, और मानुष) वाला क्षेत्रवाद चलाया … फेल हो गया.
हम प्रबुद्ध है भद्र लोग है वाला वर्गवाद चलाया … फेल हो गया,
संविधानकी हत्या हो रही है ऐसा आंदोलन करवाया …. फेल हो गया,
वोटचोरी हो रही है ऐसी हवा एवं आंदोलन फैलाया … फेल हो गया,
चूनाव आयुक्त विरुद्ध आंदोलन किया … फेल हो गया,
सीमा सुरक्षा दल के विरुध हवा फैलाया … फेल हो गया,
जनरेशन झॅड शब्दसे युवा वर्गको उकसाया … फेल हो गया.
न्याय तंत्रके विरुध्ध हवा फैल रही है … फेल हो रहे है,
कॉकरोच जनता पार्टी स्थापित हो गई है और उसमें लाखोकी संख्यामें युवा वर्ग सदस्य बन रहे है. जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने वाले है. … फ्लोप हो गया
अब युवा सदस्योंकी संख्या करोडोमें होनेवाली है. … आंदोलन जारी रहेगा, यह आंदोलन देशव्यापी होने वाला है.
अब कॉकरोच जनता पार्टी के बाद किसकी बारी है?
कॉकरोच जनता पार्टीके बाद “खटमल” जनता पार्टी बनने वाली है. वह तो पूरे ब्रह्माण्डमें आंदोलन करने वाली है.
हंसो मत.
शिरीष मोहनलाल दवे
चमत्कृतिः
पता है संस्कृत में क्या कहा गया है?
कमले कमला शेते, हर शेते हिमालये,
क्षिराब्धौ च हरि शेते, मन्ये मत्कुण शंकया.
मतलब कि; लक्ष्मि देवी कमलपर सो जाती है, शिवजी (बर्फीला पहाड) हिमालय पर सो जाते है,
खारे समूद्रमें विष्णु सो जाते है. ऐसा क्यूँ? मुज़े लगता है कि सबका कारण खटमल ही तो है.
अब जब खटमल जनता पार्टी बनेगी तो जब लक्ष्मि, शिवजी और विष्णु तक दूर भाग जाते है तो नरेंद्र मोदी किस खेतकी मूली?