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Archive for August, 2026

सबसे बडे देश द्रोही (गद्दार) कौन ? भाग – ३ / ३

गद्दार के स्तर कितने है

अपने देशकी भूमिको जानबुझ कर हार जाना,  ( हवाई सेना का उपयोग नहीं करना भारत  और चीन युध्ध)

अपने देशकी भूमिको असुरक्षित रखके हार जाना, (चीन की सेनाकी घुसपैठ दशक से चालु थी. फिर भी सीमा पर भारतीय सेना रखी नहीं थी.

अपने देशकी भूमिको कोई बारबार चेतावनी दे तो भी उनको अनदेखा करना और फिर हार जाना, (सरदार पटेलने और संसदके देशप्रेमी सदस्योंने नहेरुको चेतावनी दी थी)

अपने देशकी भूमिको  गलत व्युहरचनासे चेतावनी मिलने पर भी हार जाना, (भारतीय भूमि गत सेना को सीमा पर सज्ज रखी होती और वायु सेनाका भी उपयोग किया होता तो भारतकी पराजय न होती.)

हमारे देशकी पराजयको जूठलाना और उसके साथ खेला करना, (प्रदीपजी नहेरुद्वारा गीत लिखवाना)

व्युहात्मक भूमि यदि मिले तो देशको फायदा भी हो तो भी उसको नहीं लेना, (पीओके, बलुचिस्तान, पख्तुनिस्तान, जो भारतके साथ जुडनेको तयार थे, उसका नहेरुने किसीको बिना पूछे अस्विकार कर दिया था)

देशकी सेना यदि विजयी बनती रहे तो उसको रोकना, (भारतकी सेनाकी पीओके परकी आगेकुचको नहेरुने रोक दी थी.)

अपनी  देशहितकी शपथोंको जानबुझ कर भूल जाना, (भारतकी चीनके साथ युध्धके बाद  नहेरुने संसदके समक्ष कभी निभाई नहीं और समय सीमा भी तय करनेसे इंकार कर दिया)

अपने देशकी इतिहासकी घटनाओंकी क्षतियोंसे बोधपाठ न लेना और   चेतावनी मिलनेपर भी और याद दिलाने पर भी भूल जाना, (नहेरुद्वारा, तिब्बट पर चीनके आक्रमणको न्यायिक दिखाना और तिब्बट को मदद नहीं करना, भारतके आधिपत्य वाली भूमि चीनकी सेनाकी घुस पैठको अनदेखी करना)

दुश्मनके गलत तर्कको स्विकार करलेना, (चीनने तिब्बट के बारेमें कहा था कि तिब्बट तो चीनके आधिपत्यमें था. उसको नहेरुने स्विकार लिया था. लेकिन भारतके कई राजाओंने भी तिब्बट पर शासन किया था तो भारतका भी तिब्बट पर हक्क बनता है. लेकिन यह तर्क   नहेरुको स्विकार्य नहीं था.

देशके साथ गद्दारी करनेवाले अपने चहितेके मदद करना, (नहेरुके लिये मेनन और शेख अब्दुलाह चहिते थे. मेननको चीनसे हारनेके बाद भी नहेरुने मेननको मंत्रीमंडलसे हटाया नहीं था. शेख अब्दुलाको खुश करनेके लिये ३७० और ३५ए का प्रावधान किया था.))

जो मान्य दुश्मन है जो अपनी फर्ज जानबुझ  कर चूकता है तो भी उसको मदद करते रहेना. (नहेरु लियाकत अली समजौता के अनुसार अल्प मत कोम्युनीटीको सुरक्षित रखनेके लिये संविधानमें प्रावधान रखके उसका अमल करना था. नहेरुने तो मुस्लिमोंको जनतंत्रके सिध्धांतोकी भी अवहेलना करके मुस्लिमोंको हिंदुओंसे भी अधिक अधिकार दिये थे. पाकिस्तानकी सरकारने तो ऐसा कुछ भी किया नहीं. इंदिराने सभी पाकिस्तानी युध्धकैदीयोंको जो औसत ९३००० थे. उनको छोड दिया. पाकिस्तानने औसत ४५० भारतीय  युध्ध कैदीयोंको छोडा नहीं.)

इंदिराने तो पीओके की जो भूमि हमारी सेनाने जीत ली थी वह भी पाकिस्तानको परत कर दी. यह बात संविधानके विरुध्ध थी. १९७१ इंडो – पाक युध्धके बाद सुरक्षा मंत्री जगजिवन रामने संसद समक्ष कहा था कि इस समय हम दुश्मन देशकी जीती हुई भूमिको (१९६५के युध्धकी तरह) वापस नहीं करेंगे. लेकिन इंदिराने संसदको बताये बिना और सुरक्षा मंत्रीसे मसलत किये बिना परत कर दी थी.   

शिरीष मोहनलाल दवे

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सबसे बडे देश द्रोही (गद्दार) कौन ? भाग – २ / ३

चीनकी सेनाकी अस्खलित आगेकूच  को देखकर, सरकारके वाजिंत्रोंने सेनाके जवानोंकी तकलिफोंका गान चालु किया.

जनताको जब पता चला सरकारको पैसे की अति आवश्यकता है, तो जनताने सोनेके गहेने और वस्त्र  दानमें देने लगी. किसीको भी इसका अता पता नहीं कि उन सोनेके गहनोंका क्या हुआ. जिस सी.एम. ने इन गहेनोंकी कस्टडी ली थी, उसने कहा कि, ये गहने तो मेरी मां के गहेने है. मेरी माँ वेश्या थी. वह  कैसे हिसाब रखती?

नहेरुने भारतकी पराजयका कैसे बचाव किया?

नहेरु उवाच “ दुश्मनने हमें दगा दिया है” “दुश्मनने हमारा विश्वासघात किया है” …. “अब हम खोई हुई भूमि वापस लिये बिना चैनसे बैठेंगे नहीं.”  “आराम हराम है.”

राजगोपालाचारीने कहा “दुश्मन दगा नहीं देगा तो और कौन दगा देगा”?

दुश्मनकी (चीनकी) सेनाको कोई रोकनेवाला नहीं था इस लिये उसने अपने क्लेमसे अधिक १८००० वर्ग मील भूमि पर कब्जा कर लिया. फिर उसके ध्यान पर यह बात आयी तो उसने उस भूमि खाली कर दी और युद्ध विराम घोषित कर दिया.

सर्वोदय नेता विनोबा भावेने  चीनकी सराहना भी की कि “यह घटना जगतके इतिहासमें प्रथम है जहाँ विजयी देशने युद्धविराम किया हो.”

नहेरुने पराजयसे जनताका ध्यान हटाने के लिये प्रदीपजीसे कहा कि हमारी सेनाके जवानोंके त्याग और वीरताको दिखाने वाला गीत बनाओ. उनके बलीदानोंकी प्रशंसा करो. लेकिन याद रक्खो कवितामें चीनका नाम तक नहीं आना चाहिये.

प्रदीपजीने गीत लिखा, सी रामचंद्रने उसको संगित दिया और लताजीसे अपना स्वर दिया.

ऐ मेरे वतन के लोगों, तुम खूब लगा लो नारा [ अरे भाया! काहेका नारा?]
ये शुभ दिन है हम सबका, लहरा लो तिरंगा प्यारा [ पराजयका दिन क्या शुभ दिन है? अरे नहेरुजी, आपने हवाई सेना भेजी होती तो भारतीय जनता विजय दिन मनाती. चीन हमसे हर क्षेत्रमें पीछे था. और ऐसा आपके चहिते समाजवादी अशोक महेताने ही कहा था ]
पर मत भूलो सीमा पर, वीरों ने है प्राण गवाए [बीना शस्त्र कोई भी जवान प्राण गवाता]
कुछ याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए [1] [अस्त्र शस्त्र हीन जवान लडने जाते तो वापस आ ही नहीं सकते. नहेरुने अपनी जीम्मेवारीको छूपादी]

ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुर्बानी [1] [रोना नहीं आता है तो भी आंखे गीली भी तो कर लो. हमारे जवानोंने बलिदान ही तो दिया ही है.]

  • जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आजादी, संगीन पे धरकर माथा, वो अमर बलिदानी सो गए। [1]  [ अरे नहेरुजी, हिमालय नहीं घायल हुआ था. भारतके जवान और भारतीय जनताका नहेरु परका विश्वास घायल क्या मर ही गया था.]
  • जब हम घरों में दीपावली मना रहे थे, वो सरहद पर गोलियां सहकर होली खेल रहे थे। [1]  [सुख विरुध्ध दुःख का  विरोधाभाष उत्पन्न करनेसे नहेरु अपनी माया उत्पन्न करते है]
  • हर वीर भारतवासी (सिख, जाट, मराठा, गुरखा, मद्रासी) सरहद पर शहीद हुआ। [1] [ अरे भाया नहेरु, यह बात भारतकी जनता को तो हजारों सालसे पता है. केबीनेट मीशनका स्वागत तो नहेरुने ही तो किया था. गांधीजीने तो केबीनेट मीशनको बोयकोट करनेका बोला था]
  • खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने दस-दस दुश्मनों को मारकर अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ी। [1] [ वैसे तो यह जूठ ही था. भारतके १३८३ जवान मरे थे. चीनके ७२२ सैनिक मरे थे. यदि भारतकी सेनाके एक जवान ने चीनके १० सैनिकोंको मारा होता तो चीनके १३८३० सैनिक मरते. लेकिन चीनके ७२२ सैनिक मरते. लेकिन यदि यह सच बताते भारतीय सेनाकी प्रशंसा नहीं होती. नहेरुकी बुराईको ढकने के लिये, हमारे जवानकी प्रशंसा कर दी. वास्तवमें भारतके जवान बीना अस्त्र शस्त्र के अभावमे लडे और यदि उन्होने ७२२ चीनी सैनिकोंको मारा तो भी वे प्रशंसा के योग्य थे.]  
  • ये निर्भय और अभिमानी वीर, जो अपनी मुट्ठी में मौत लेकर लड़े, उनकी कहानी हमें भूलनी नहीं चाहिए। [1, 2, 3] [भाया नहेरुजी, दुसरोंको कहेनेसे पहेले अपने आपमें ज़ाखो. “खोई हुई भारतकी भूमिको वापस लिये बिना हम कोंगी लोग चैनसे बैठेंगे नहीं” यह आपकी शपथ आपने आपके पक्षने संसद समक्ष ली थी, और आप और आपके फरजंद जानबुझ कर भूल ही गये. इतिहास गवाह है.]

जय हिन्द, जय हिन्द की सेना…

क्रमशः

शिरीष मोहनलाल दवे

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सबसे बडे देश द्रोही (गद्दार) कौन ? भाग – १ / ३

हमने बडे चावसे १५ अगस्त का दिन मनाया.

हम हमेशा एक गीत तो सूना करते है !

“ अय मेरे वतनके लोगो, जरा आंखमें भरलो पानी ।

शहिद हुए है उनकी जरा याद करो कुरबानी … ॥

जरा याद उन्हे भी कर लो  ।

जो लौटके घर न आये     ॥ “

कुछ समज़दार लोगोंको इस गीत को सूनकर गुस्सा आता है. इस लिये नहीं कि उनको शहिदोंके प्रति मान सन्मान  नहीं है. लेकिन इस लिये कि यह गाना, जेल. एल. नहेरु ने (जवाहर लाल नहेरुने) १९६२की भारतकी चीनसे पराजयके बाद, प्रदीपजीसे लिखवाया था.

भारतकी पराजय होना वैसे तो नामुमकिन रहा है. सिवा कि भारतके गद्दारोने दुश्मन सेनाको सहायता की न हो. जब भी भारतके गद्दारोंकी दुश्मन को सहायता मिली, भारत हारा है.

हाँ जी, भारतकी सेना कभी युद्धमें हारी नहीं है. चाहे वह समय पर्वतराज (पोरस)का हो या कारगील युद्ध हो.

जी हाँ. भारतमें राक्षसोंकी कमी नही थी, और न है.

राक्षस वह है जो अपने स्वार्थके लिये लडता है. और वह अपनी मायावी वृत्तिसे दुश्मन-सेनाको गुमराह करता है.

कौटिल्यके हिसाबसे, सबसे पहेला दुश्मन पडौसी देश होता है.

राक्षसोंका ज़ूठ और माया

  • तीब्बट एक स्वतंत्र राष्ट्र था. तीब्बटका ब्रीटीश राज्यसे १९१४में समज़ौता हुआ था कि मेक मोहन लाईन, जो हिमालयके हरेक उच्च शिखरकी टोच परसे पसार होनेवाली रेखा है वह भारत और तिबटकी मान्य सीमा रेखा है.
  • आप कहीं भी जांच करेंगे तो आपको बार बार यही दिखाई देगा की चीनको मॅक मोहन सीमा रेखा मान्य नहीं था. क्यूकि भूतकालमें कभी चीनी राजा का तीबट पर शासन था. वैसे तो भारतका भी तीबट पर कभी न कभी शासन रहा था. लेकिन जेल. एल. नहेरुको ऐसी बातें पसंद नहीं थीं. क्यों कि वे मानते थे भला मैं तो समाजवादी हूँ, और चीन तो हमारा यार है.
  • सरदार पटेलने नहेरुको चीनकी विस्तारवादी चरित्रसे चेतावनी दी थी.
  • भारतकी संसदमें भी यह प्रश्न उठता रहेता था. चीन भारतकी भूमि पर ५०के दशकमें रोड कंट्रक्सन कर रहा था और अपनी सेना द्वारा भारतमें घूसण खोरी भी कर रहा था. लेकिन इन बातोंको जे. एल. नहेरु हमेशा जूठलाया करते थे, और तत्त्वज्ञानकी बात करने लगे थे.
  • कनैयालाल मुंशी जो गुजरातके एक इतिहासकार भी थे उन्होने भी जे. एल. नहेरुकी मान्यताओंको पडकारा था. लेकिन जे. एल. नहेरुने “शीट” बोलके उनकी भर्त्सना की थी.
  • संसदमें जब क्रिपलानीने कहा कि युनोमें यह समस्या ले जाओ या युध्ध करो. तो जे. एल. नहेरुने तत्त्वज्ञानी अंदाजमें कहा था कि यु. नो. ने अभी तक एक भी समस्या हल किया नहीं है. और युद्ध कभी समस्याका हल हो नहीं सकता.
  • मोरारजी देसाईने कहा सेना के लिये अधिक प्रावधान करें. तो मेनन जो उस समयके सुरक्षा मंत्री थे, उन्होंने कहा “उतने शब्दोंमें तो मैं चीनको आक्रमण करनेसे रोक दूँ

हो सकता है कि जे.एल. नहेरुने चीनको बोला हो कि, भाया माओ, हमार १९६२का आम चुनाव हो जाने दो, फिर तुम्हारे लिये हमारी भूमि तयार है. तुम्हे जीतनी भूमि चाहिये उतनी लेलो. मेरी  २० % ही जनता ही पढना जानती है. उसमें भी अखबार पढने वाली तो २ % ही होगी. और मेरे पास तो ५ साल का समय पडा होगा, उस समय दरम्यान तो मैं मेरी माया से कई तत्त्वज्ञानीय पराक्रम कर दूंगा.

१९६२के पूर्वार्धमें नहेरुने आम चूनाव करवा दिया. आम चूनाव जीत भी लिया. भाया माओ, अब आ जाओ.

 फिर चीनने १९६२के उत्तरार्धमें केक वॉक द्वारा ९१००० चोरस मील भारतकी भूमि पर कबजा कर लिया. हमारे सैन्यके पास न तो बर्फीली भूमि पर चलनेके लिये जूते थे न तो ठंडमें पहननेके कपडे थे. शस्त्र सरंजामकी तो बात ही छोडो. भारतीय सेनाके जवानोंने तो बुलेटके अभावमें चीनकी सेना पर पत्थरबाजी भी की थी. इस बातका उल्लेख, चीनने किया है.

क्रमशः

शिरीष मोहनलाल दवे

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