Archive for June, 2023
१९७७ का विपक्षी गठ बंधन २०२४ का विपक्षी गठबंधन भाग – ३
Posted in Uncategorized on June 26, 2023| Leave a Comment »
१९७७ का विपक्षी गठ बंधन २०२४ का विपक्षी गठबंधन भाग – २
Posted in Uncategorized, tagged अहिंसक नव निर्माण आंदोलन, इंदिरा गांधी, इंदिरा गांधीने कैसे पैसे बनाये, घनश्यामभाई ओझा, चालाक और दंभी नहेरु, चिमनभाई पटेल, चीनी आक्र्मण, जनता मोर्चा जनता फ्रंट की जीत, जयप्रकाश नारायण प्रभावित, जीपस्केंडल, फिरोज़ घांडी द्वारा आरोपित मूंद्रा प्रकरण, मूंगफलीका तेल, मेनन on June 26, 2023| Leave a Comment »
१९७७ का विपक्षी गठ बंधन २०२४ का विपक्षी गठबंधन भाग – २
चालाक एवं दंभी नहेरु
नहेरुने १९५०से १९६४ के अंतर्गत अनेक जूठ बोले, एवं अनीतियाँ अपनायी. जिनमें चीनके साथ वाली देशके हितको अपार नुकशान पहोंचानेवाली नीति, चीनका भारत पर आक्रमण और चीना भारतकी ९१००० चोरस मील भूमिपर कब्जा, मेनन वाला जीप स्केंडल, पारसी सदस्य एवं नहेरु विरोधी फिरोज़ घांडी द्वारा आरोपित मूंद्रा प्रकरण … काश्मिर समस्या … आदि कई कारण सामेल थे जिनके लिये केवल और केवल नहेरुका ही उत्तरदायी थे.
नहेरु एक चालाक सियासती नेता थे. उन्होनें कामराज प्लान लाके, अपने विरोधीयोंको कमजोर किया और संगठन पर अपनेवालोंकी पकड जमायी.
मोरारजी देसाईको मंत्री मंडलसे निकालके उनको कमजोर किया. मीथ्या एवं फरेबी शपथ लिया की जब तक खोयी हुई भूमि वापस नहीं लेंगे, तब तक हमारा पक्ष चैनसे बैठेगा नहीं. लता मंगेशकरसे “ओ मेरे वतनके लोगों जरा आंखमें भरलो पानी … ऐसा गीतका आलाप करवाके, दुश्मन ने हमें दगा दिया (दुश्मन दगा नहीं देगा तो और कौन देगा?) अपनेको दयनीय अवस्थामें स्थापित किया. समाचार माध्यम भी नहेरुके समर्थक थे. नहेरुने संगठनमें अपनीक टीम “सींडीकेट” बनायी. कामराज आदीको विश्वासमें लेके उनकी पूत्री इंदिराको अपना अनुगामी बनानेका पूर्व प्रपंच किया. १९६४में नहेरुका आराम करते करके अवसान हुआ. १९६५में पाकिस्तानने भारतको कमजोर मानके आक्रमण किया. रुसने मध्यस्थी की और तत्कालिन प्रधान मंत्री लालबहादुर शास्त्री पर दबाव डाला कि “दोनों देश अपनी अपनी जीती हुयी भूमि वापस करे” ऐसे एग्रीमेंट पर दस्तखत करें. शास्त्रीजीकी मृत्यु विवादास्पद है. ऐसी तो कई मृत्यु विवादास्पद है. एक और.
पूर्व निर्धारित योजनाके अनुसार मोरारजी देसाईका हक डूबोके, इंदिरा गांधीको प्रधान मंत्री बनाया गया. इंदिरा गांधी सियासती मामलोमें कुशल थी लेकिन प्रशासनमें कमजोर थी. १९६७के चूनावमें कोंग्रेसने बहुमत तो हांसिल किया. लेकिन वह बहुमत पतला बहुमत था. इंदिरा प्रशासनमें कमजोर थी. व्युह रचनाके मुताबिक इंदिराने समाजवादी समाज रचना के आधार पर बेंकोका राष्ट्रीयकरण किया. इसका समाचार माध्यमो द्वारा खूब प्रचार हुआ. कोंग्रेसमें दो गुट तो हो ही गये थे. मूडीवादी और समाजवादी.
सींडीकेटने देखा कि इंदिरा गांधीने साम्यवादीयोंके साथ गुप्त गठबंधन किया है, तो सिंडीकेटके नेतागण अपना समर्थन मोरारजी देसाईको देने लगे.
देशके प्रमुखके चूनावमें कोंग्रेसका प्रत्याशी संजिव रेड्डीको बनाया. यह बाद इंदिरा गांधीको मंजूर नहीं थी. “आत्मा की आवाज़ पर वोट दो” इस बातको फैला के अपने अंगत पसंदगीके प्रत्याषी वीवी गिरिको जिताया.
कोंग्रेसका विभाजन
१९६९में इंदिरा गांधीने फर्जी कोंग्रेसी सदस्यो बना के कोंग्रेसकी असाधारण सभा बुलायी, जगजिवन रामको प्रमुख बनाया और नहेरुवीयन कोंग्रेसका कोंग्रेस (जगजीवनराम यानी इंदिरा यानी कोंगी) और कोंग्रेस (संस्था यानी ओर्गेनाईझेशन = कोंगो) ऐसा नामकरण हुआ. १९७०में लोकसभाका चूनाव हुआ तो इंदिराको प्रचंड बहुमत मिला. क्यों कि इंदिराने ऐसी हवा फैलायी कि उसके पिताजी और स्वयंको तो बहुत कुछ करना है लेकिन यह बुढ्ढे सीडीकेटके लोग हमको काम करने नहीं देते थे और है. समाचार माध्यमोंने इस बातको पूर जोशसे फैलाया था.
पाकिस्तानके चूनावमें मुजीबुर रहेमान का पक्ष विजयी हुआ. वे पूर्व पाकिस्तानी थे. वहाँ के लश्करी शासक को यह मंजूर नहीं था. पूर्व पाकिस्तानमें हिंसक/अहिंसक आंदोलन चालु हुआ. अनेक हिंदुओंका और बंगाली मुस्लिमोंका कत्ल हुआ. पूर्व पाकिस्तानसे काफी बिहारी मुस्लिम एवं हिंदु निराश्रीत बनके भारतमें आये. वैसे भी ऐसा सिलसिला तो १९६५से ही पश्चिम पाकिस्तानसे भी चालु ही था. पाकिस्तानने भारत पर हमला कर दिया ताकि पाकिस्तानकी अपनी समस्यांसे अपने लोगोंका ध्यान हटें.
अनिर्णायक एवं अज्ञानी इंदिरा
निराश्रितोंका लगातार आना चालु ही था. इसके कारण इंदिरा गांधी पर सैन्य कार्यवाही करने का दबाव था. लेकिन इंदिरा गांधी अपनी वंशानुगत आदतसे अनिर्णायक अवस्थामें थी. उस परिस्थितिमें पाकिस्तानने भारत पर आक्रमण कर दिया. भारतीय सेना तो जवाब देनेके लिये तयार ही थी. भारतने विजय पायी. लेकिन इंदिरा गांधीने इस विजय को संपूर्ण पराजयमें परिवर्तित कर दिया. जीती हुई भूमि वापिस नहीं करेंगे ऐसी शपथ लेनेके बाद भी इंदिराने सिमला समज़ौतेमें पाकिस्तान को ९१००० पाकिस्तानी सैनिकोंको वापस कर दिया और भूमि भी वापस कर दी. इतना ही नहीं पाकिस्तान हस्तगत काश्मिर की भूमि भी जो भारतीय सेना ने जिता था वह भी वापिस कर दिया. भारतका एक भी सेनानी कैदी पाकिस्तानने परत नहीं किया.
गुजरातके विधान सभाके चूनाव और नवनिर्माण आंदोलन
गुजरातके विधान सभा चूनाव १९७१में वैसे तो कोंगीको बडी जीत हुयी थी. १६५मेंसे १४० सीटोंपर विजयी हुई थी. इंदिराने अपना मुख्य मंत्री बनाया. बहुमत चिमनभाई पटेलके पक्षमें था फिर भी घनश्याम भाई ओझा को मुख्य मंत्री बनाया. चीमनभाई ने आंतरिक बगावत की और इंदिरा द्वारा स्थापित मुख्य मंत्रीको हटाके स्वयं उस स्थान पर कायदेसे आ गये. कोंग्रेसके आंतरिक कलहसे शासन अव्यवस्थित था. महंगाई चरम सीमा पर थी. गुजरातमें नवनिर्माण आंदोलन “करप्शन हटाओ” नामसे शुरु हुआ. मूंगफलीके तेलका गुजरातमें बडा कारोबार चलता है. चिमनभाईने वचन दिया कि ९ रुपये प्रति किलोसे भाव आगे नहीं बढेगा. लेकिन दुसरे दिन ही ९.२५ रुपये प्रतिकिलो हो गया. आंदोलनमें तेजी आयी. “चिमन भाई पटेलको हटावो” के सूत्रपर आंदोलन तेजी पकडने लगा. इंदिरा गांधीने चिमन भाई पटेलको हटाया और राष्ट्रपति शासन लगाया. इसीके अंतर्गत कोंग्रेस (संस्था) और अन्यदल भी आंदोलनमें सामेल हो गये थे. महात्मा गांधीके अनुयायी जयप्रकाश नारायण भी “भ्रष्टाचार हटाओ” के आधार पर चलते आंदोलनसे प्रभावित हो गये थे. आंदोलन महद् अंशोंमें अहिंसक था. चिमनभाई के मुख्यमंत्री पदसे हटानेसे वे खुलकर इंदिराके सामने आ गये थे. उन्होंने एक पुस्तक भी प्रकाशित की कि इंदिरा गांधीने कैसे पैसे बनाये. गुजरातका विपक्ष संगठित हो गया था. एक जनता फ्रंट (जनता मोर्चा) बना. और १९७५के विधान सभा चूनावमें इस जनता फ्रंटकी जीत हुयी.
यह जीत भ्रष्टाचारके सामने नीतिमत्ता की जीत थी.
गुजरातकी जीतसे प्रेरित होकर जयप्रकाश नारायणने देशव्यापी आंदोलन शुरु किया.
(क्रमशः)
शिरीष मोहनलाल दवे