कैसे मुक्त और निष्पक्ष चूनाव हो सकता है – २
हमने पार्ट – १ में देखा की कैसे चूनाव आयुक्त के कार्यालय परावलंबी है. चूनाव आयुक्त और चूनाव आयुक्त के कार्यालयोंका परावलंबी होना ही उसकी कमजोरी है. मतलब कि चुनाव आयुक्त जो शक्य है वैसा मुक्त और स्वतंत्र चूनाव नहीं कर सकता है.
चूनाव आयुक्तके कार्यालयोंका जो वर्ग – १, २ और ३ के कर्मचारीगण है वह केवल चूनाव घोषित हो और चूनाव के परिणाम घोषित हो जाय और जब निर्वाचित सदस्य अपने होद्देकी प्रतिज्ञा ले लें तब तक ही ये कर्मचारी गण मुख्य चूनाव आयुक्तके प्रशासनिक नियंत्रणमें रहेते है. अन्यथा तो वे मुख्य सचिव, मंत्री, मुख्य मंत्रीके आधिन रहेते है.
मानव सर्जित क्षतियाँ तकनिकी प्रणालीयाँ द्वारा दूर हो सकती है.
निष्पक्ष और मूक्त चूनाव के अंतर्गत मानवसर्जित क्षतियाँके कर्ता कौन कौन है?
यदि राज्यका मुख्य मंत्री ममता बेनर्जी जैसा, केजरीवाल जैसा, …. गुंडोंके/आतंकवादीयोंके गुटोंका हिस्सा हो तो उनके अफसर सहित कर्मचारीगण हमेशा उनसे भयभित ही रहेते है. हमने देखा ही है कि केजरीवालकी चेंबरमें एक मुख्य सचिवकी पीटाई भी हुई थी. ममता तो बेनर्जी तो केंद्रकी जांच एजन्सीयोंकी पीटाई करवाती, गवर्नरको भी पीटवाने की धमकी देती है … तो ममताके लिये रेवन्युके अफसर तो क्या चीज़ है? ममताने तो स्वयंके पक्षको मत न देनेवाले मतदाताओंके उपर आतंक फैलाया था.
क्या चूनाव आयुक्तको यह बात ज्ञात नहीं है?
जो मुख्य मंत्री गुंडोंके नेटवर्कका हिस्सा होता है वह बडी आसानीसे पोलींग बुथका कबजा कर सकता.
पोलींग बुथ पर कबजा कैसे होता है?
(1) जो भी पोलींग बुथके भौगोलिक विस्तार पर, मुख्य मंत्रीका गुन्डा नेटवर्क सशक्त है वहाँ अपने विरोधी मतदाताओंको भयभित करके उन्हें घरके बाहर ही नहीं निकलने दिया जाता है. इस प्रकार उन्हें मतदानसे रोका जाता है.
(2) पोलींग बुथके सरकारी कर्मचारी जो मतदाता का फोटो आईडेंटींटी चेक करता है उसको अलिखित आदेश होता है कि पहेचानके लिये वह सख्त न हो. कभी कभी चिन्हित मतदाता जिसका सीग्नल एक सुनिश्चित व्यक्ति देता है उसकी पहेचान न करें या बिलकुल नर्मीसे करें.
(3) बुर्खे वाली महिलाओं की पहेचान न करें,
(4) पोलींग बुथके उपर उपस्थित पक्षीय बुथ एजंटको मतदाताको पहेचाननेकी सुविधा एवं हक्क नहीं होता है. इतना ही नही चूनावके प्रत्याषीको भी यह हक्क होता नहीं है कि वह मतदाताका फोटो वाला पहेचान कार्ड चेक करें.
(5) वैसे तो पोलींग बुथका पुरा वीडीयो रेकोर्डींग होता है. लेकिन पोलींग बुथके पक्षीय एजंटको इस ईडीयो रेकोर्डींग की कोपी मिलती नहीं. पक्षके प्रत्याषीको भी सभी पोलींगबुथकी वीडीयो रेकोर्डींगकी कोपी मिलती नहीं है.
ऐसी व्यवस्था विद्यमान होनेसे से बोगस मतदान को नकारा नहीं जा सकता. बोगस व्यक्तिद्वारा मतदान करवाना बुठ केप्चरींगके ही है. फर्क केवल प्रमाणका है, या फर्क नहीं भी हो सकता है.
हर किस्सेमें मतदाता व्यक्ति सही है या नहीं उसका फोटो चेक करनेसे या हस्ताक्षर चेक करनेसे सही पहेचान नहीं हो सकती है.
क्या मतदानकी प्रक्रिया बिलकुल क्षति रहित हो ऐसा नहीं हो सक?
मानव चाहे मुख्य मंत्री हो या/और गुंडा नेटवर्कका हिस्सा हो या न हो, वह पोलींगबुथके स्टाफको भयभित कर सकता है. ऐसा किया हो या न किया हो, पक्षीय एजंटोंको करप्ट किया हो या न किया हो, लेकिन इन सक्यताओंको लक्ष्यमें लेना अनिवार्य बनना आवश्यक है.
बुथ केप्चरिंग करनेकी “सियासती आदत” नहेरु और नहेरुवीयनोंने व्यापक रुपसे डाली हुई है. नहेरुवीयन्स और उनके सांस्कृतिक साथी लोग इसीलिये तो बेलेट पेपरवाली प्रणाली लानेके लिये लगातार आग्रह कर रहे है. और उनकी बात न मानने पर न्यायालय और चूनाव आयुक्तको बिके हुए मानते है. वर्तमान प्रणालीमें बुथकेप्चरींग करने कि शक्यता प्रमाणमें कम है. यही उनको नडता है.
मतदान को अवश्य १०० प्रतिशत मुक्त और स्वतंत्र किया जा सकता है. ऐसी तकनीकी प्रणाली बनायी जा सकती है, जिसमें मतदान संपूर्ण क्षतिरहित हो, और चाहकर भी कोई फर्जी मतदान न कर सकें. जो नागरिक मतदान करनेको आया है वही सिर्फ वही मतदान कर सके.
मतदान सही नागरिक द्वारा ही हो, भय मुक्त हो ऐसा कैसे किया जा सकता है?
सबसे पहेले तो देशका “नागारिक रजीस्ट्रेशन सूचि” बनाना चाहिये. इस क्रियामें व्यक्तिको अपनी नागरिकता सिद्ध करनेके लिये डॉक्युमेंट (पेपर) तो दिखाना ही पडेगा.
मुस्लिम घुसपैठीयोंका भारतमें आना १९६५के भारत – पाकिस्तान युद्धके बाद अधिकमात्रामें प्रारंभ हुआ था. १९६५के पूर्व यदि कोई मुस्लिमने अथवा उसके माता पिताने वोट दिया था तो उनका नाम उस समयके मतदाता सूचिमें है या नहीं, वह सरकारको चेक करना पडेगा. जनगणना सूचिमें भी चेक करवाना पडेगा. यदि वह बिन-मुस्लिम है तो उसको ऐसी कोई आवश्यकता नहीं. क्यों कि “नहेरु – लियाकत अली” समज़ौतेके अंतर्गत वे अपने आप नागरिक बन जाते है. सी. ए. ए. के अनुसार भी वे नागरिक बन जाते है. लेकिन उनको और/या उनके माता-पिता को एक रजीस्टर्ड प्रतिज्ञापत्र देना पडेगा कि, वे बिनमुस्लिम होनेके कारण पीडीत हुए थे और इसके कारण वे भारत आये थे.
भारतीय नागरिकताकी पहेचान वाला पत्र, बायोमेट्रीक पहेचान पत्र होना चाहिये जिनमें दश उंगलीयां और फेसीयल पहेचान भी सामेल हो.

तकनीकी प्रणाली कैसी होनी चाहिये?
आप पेंशनरका “ओन लाईन लाईफ सर्टीफीकेट” (जीवन प्रमाण)की प्रणाली देखो. उस प्रणालीमें पेंशनर को स्क्रीनके सामने १५ ईंच की दूरी पर अपना चहेरा रखके आपनी दो आंखे दो तीन बार झपकाना पडता है. इससे व्यक्तिके चहेरेकी बायोलोजीकल पहेचान सिद्ध हो जाती है.
इसी प्रकारकी प्रणाली (सीस्टम), मतदान बुथके माईक्रोप्रोसेसरमें अपलोड करना है.
पोलींग बुथके उपरोक्त स्क्रीन के उपर एक ग्रीन लेंप होगा. बायोलोगीकल आईडेंटीटी चेक हो जाने पर वह ग्रीन लेंप जलेगा. ग्रीन लेंप आनेसे “पोलींग पेड” एक्टीवेट हो जायेगा. व्यक्ति, अपने मन पसंद प्रात्याषीके प्रतिकका बटन दबायेगा. तब ग्रीन लेंप ओफ हो जायेगा और बाजुके वी.वी. पेक बोक्समें प्रत्याषीका चूनाव चिन्ह क्षणभरके (चार सेकंडके) लिये दिखाई देगा और परची भी उसमें गीरेगी.
ग्रीन लेंप ऑफ जाना बुथ लेवल अधिकारीको दिखाई देगा. फिर वह गेट सुरक्षा पर खडे दुसरे मतदाताको बुलायेगा. उसके पास अपना मतदाता फोटो पहेचान पत्र है या नहीं वह देखेगा कि वह यही पोलींग बुथका लीस्टवाला मतदाता है या नहीं. उसके बाद उसको पोलींग बुथके कोर्नर पर मतदान के लिये भेजेगा. पोलींगबुथके इलेक्ट्रोनिक नेटवर्कके सभी उपकरण वायरसे कनेक्टेड रहेगे. कुछ भी वायरलेस नहीं होगा. माईक्रोप्रोसेसर होट-स्टेंड बाय टाईप होगा.
सीस्टम ऐसा होगा कि जिसने मतदान किया है वह फिरसे मतदान नहीं कर पायेगा. मतदाता उसी पोलींग बुथ विस्तार का होना अनिवार्य है.
गुंडाग्रस्त पोलींग बुथ मतदान विस्तार में क्या प्रक्रिया करना है वह सब विस्तारसे चूनाव आयुक्त के परिचालन (मेन्युअलमें) है. वह कितना असरकारक है वह बात एक संशोधनका विषय है.
नंदीग्रामके गरीब मतदाता के उपर कैसा आतंक ममताके गुंडोंने फैलाया था वह जनता जानती है. उच्च न्यायालय भी जानता है, राज्यका गवर्नर भी जानता है, चूनाव आयुक्त भी जानता है. ऐसी घटनाओंकी जाँच, न्यायिक कार्यवाही शिघ्रातिशिघ्र होना अनिवार्य है. ममता और उनके गुण्डोंको जब तक न्यायिक कार्यवाही अंतिम पडाव तक न पहोंचे उस समय तक उनको कारावासमें रखना चाहिये.
शिरीष मोहनलाल दवे
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