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सबसे बडे देश द्रोही (गद्दार) कौन ? भाग – १ / ३

हमने बडे चावसे १५ अगस्त का दिन मनाया.

हम हमेशा एक गीत तो सूना करते है !

“ अय मेरे वतनके लोगो, जरा आंखमें भरलो पानी ।

शहिद हुए है उनकी जरा याद करो कुरबानी … ॥

जरा याद उन्हे भी कर लो  ।

जो लौटके घर न आये     ॥ “

कुछ समज़दार लोगोंको इस गीत को सूनकर गुस्सा आता है. इस लिये नहीं कि उनको शहिदोंके प्रति मान सन्मान  नहीं है. लेकिन इस लिये कि यह गाना, जेल. एल. नहेरु ने (जवाहर लाल नहेरुने) १९६२की भारतकी चीनसे पराजयके बाद, प्रदीपजीसे लिखवाया था.

भारतकी पराजय होना वैसे तो नामुमकिन रहा है. सिवा कि भारतके गद्दारोने दुश्मन सेनाको सहायता की न हो. जब भी भारतके गद्दारोंकी दुश्मन को सहायता मिली, भारत हारा है.

हाँ जी, भारतकी सेना कभी युद्धमें हारी नहीं है. चाहे वह समय पर्वतराज (पोरस)का हो या कारगील युद्ध हो.

जी हाँ. भारतमें राक्षसोंकी कमी नही थी, और न है.

राक्षस वह है जो अपने स्वार्थके लिये लडता है. और वह अपनी मायावी वृत्तिसे दुश्मन-सेनाको गुमराह करता है.

कौटिल्यके हिसाबसे, सबसे पहेला दुश्मन पडौसी देश होता है.

राक्षसोंका ज़ूठ और माया

  • तीब्बट एक स्वतंत्र राष्ट्र था. तीब्बटका ब्रीटीश राज्यसे १९१४में समज़ौता हुआ था कि मेक मोहन लाईन, जो हिमालयके हरेक उच्च शिखरकी टोच परसे पसार होनेवाली रेखा है वह भारत और तिबटकी मान्य सीमा रेखा है.
  • आप कहीं भी जांच करेंगे तो आपको बार बार यही दिखाई देगा की चीनको मॅक मोहन सीमा रेखा मान्य नहीं था. क्यूकि भूतकालमें कभी चीनी राजा का तीबट पर शासन था. वैसे तो भारतका भी तीबट पर कभी न कभी शासन रहा था. लेकिन जेल. एल. नहेरुको ऐसी बातें पसंद नहीं थीं. क्यों कि वे मानते थे भला मैं तो समाजवादी हूँ, और चीन तो हमारा यार है.
  • सरदार पटेलने नहेरुको चीनकी विस्तारवादी चरित्रसे चेतावनी दी थी.
  • भारतकी संसदमें भी यह प्रश्न उठता रहेता था. चीन भारतकी भूमि पर ५०के दशकमें रोड कंट्रक्सन कर रहा था और अपनी सेना द्वारा भारतमें घूसण खोरी भी कर रहा था. लेकिन इन बातोंको जे. एल. नहेरु हमेशा जूठलाया करते थे, और तत्त्वज्ञानकी बात करने लगे थे.
  • कनैयालाल मुंशी जो गुजरातके एक इतिहासकार भी थे उन्होने भी जे. एल. नहेरुकी मान्यताओंको पडकारा था. लेकिन जे. एल. नहेरुने “शीट” बोलके उनकी भर्त्सना की थी.
  • संसदमें जब क्रिपलानीने कहा कि युनोमें यह समस्या ले जाओ या युध्ध करो. तो जे. एल. नहेरुने तत्त्वज्ञानी अंदाजमें कहा था कि यु. नो. ने अभी तक एक भी समस्या हल किया नहीं है. और युद्ध कभी समस्याका हल हो नहीं सकता.
  • मोरारजी देसाईने कहा सेना के लिये अधिक प्रावधान करें. तो मेनन जो उस समयके सुरक्षा मंत्री थे, उन्होंने कहा “उतने शब्दोंमें तो मैं चीनको आक्रमण करनेसे रोक दूँ

हो सकता है कि जे.एल. नहेरुने चीनको बोला हो कि, भाया माओ, हमार १९६२का आम चुनाव हो जाने दो, फिर तुम्हारे लिये हमारी भूमि तयार है. तुम्हे जीतनी भूमि चाहिये उतनी लेलो. मेरी  २० % ही जनता ही पढना जानती है. उसमें भी अखबार पढने वाली तो २ % ही होगी. और मेरे पास तो ५ साल का समय पडा होगा, उस समय दरम्यान तो मैं मेरी माया से कई तत्त्वज्ञानीय पराक्रम कर दूंगा.

१९६२के पूर्वार्धमें नहेरुने आम चूनाव करवा दिया. आम चूनाव जीत भी लिया. भाया माओ, अब आ जाओ.

 फिर चीनने १९६२के उत्तरार्धमें केक वॉक द्वारा ९१००० चोरस मील भारतकी भूमि पर कबजा कर लिया. हमारे सैन्यके पास न तो बर्फीली भूमि पर चलनेके लिये जूते थे न तो ठंडमें पहननेके कपडे थे. शस्त्र सरंजामकी तो बात ही छोडो. भारतीय सेनाके जवानोंने तो बुलेटके अभावमें चीनकी सेना पर पत्थरबाजी भी की थी. इस बातका उल्लेख, चीनने किया है.

क्रमशः

शिरीष मोहनलाल दवे

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