Posted in Social Issues, tagged अपनापन, अभिनव, अहमदाबाद, आर्षदृष्टि, कनिष्ठ, कमीश्नरकी सेना, क्षतिपूर्ण, गुणवत्ता, गोदरेज गार्डन सीटी, टाउनशीप, निम्नस्तरीय, पार्कींग, प्रबंधन, प्रशिक्षण, बदसूरत, ब्लोक, भवन, मरम्मत, मानसिकता, म्युनीसीपल कमीश्नर, रखरखाव, वृक्ष, शास्त्रीनगर, संनिर्माण, स्वछता on March 19, 2018|
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किसी भी नगरको/ग्रामको बदसूरत और गंदा कैसे किया जाय …. २
हमने समज़ लिया कि, शास्त्री नगर जो एक ठीक तरहके आयोजनसे बनाया हुआ टाउनशीप था उसको अहमदाबादकी म्युनीसीपल कमीश्नरकी गेंगने एक ही दशकमें कैसे बदसूरत कर दिया.
कौनसे परिबल है जो कोई भी नगरको या क्षेत्रको बदसूरत कर सकते है?
कमीश्नर और उसकी सेनामें निम्न लिखित गुण होते हैं
अभिनव विचारोंका अभाव (ईनोवेटीव आईडीया),
आर्षदृष्टिका अभाव,
“कुछ नया करके दिखावें”वाली सोचका अभाव,
नगरके प्रति अपनापन रखनेका अभाव (बीलोंगींगनेसका अभाव),
भविष्यदृष्टिका अभाव,
कनिष्ठ और क्षतिपूर्ण आयोजन,
क्षतिपूर्ण विशेष विवरण और आकृति, (स्पेसीफीकेशन और डीज़ाईन), यानी कि डिज़ाईन ऐसी हो कि रखरखाव कमसे कम हो,
काममें क्षतिपूर्ण गुणवत्ता,
मरम्मतमें विलंब, और मरम्मतकी गति, क्षतिग्रस्त बननेकी गति से कम होना,
स्वच्छताका निम्नस्तरवाली मानसिकता,
नीति नियमोंमे क्षतियां, और उनमे सुधार करनेकी मानसिकता अभाव,
संनिर्माणके और रखरखावके कर्मचारीमें प्रशिक्षणका अभाव,
संनिर्माण और रखरखावके अयोग्य उपकरण.
अब हम “गोदरेज गार्डन सीटी” की चर्चा करेंगे.
यह एक ऐसा नगर–क्षेत्र है जो गोदरेज प्रोपर्टीज़ नामकी कंपनीने आयोजन करके संनिर्माण किया है. १ बीएचके, २ बीएचके, २.५ बीएचके, ३ बीएचके, ३.५ बीएचके (२२ मंजिला) आदि के १२ मज़िला के भवनसमूह (ब्लोक क्लस्टर) है. ये सब मध्यम वर्गकी सुविधाओंके लिये उपयुक्त बनवाया है.

इसमें सुव्यवस्थित आयोजन है. आंतरिक मार्ग, मुख्य मार्ग और राज मार्ग की रचना का आयोजन, अहमदाबादकी तुलनामें महानगर आयुक्त (म्युनीसीपल कमीश्नर)के आयोजनसे हजार गुना अधिक अच्छा है.
दो भवन समूहके बीच पर्याप्त अंतर है,
प्रत्येक खंडमेंसे आकाश दिखाई देता है,
प्रत्येक खंडमें सूर्यकी प्रकाश आती है,
विद्युत–जलप्रबधन और आनुसंगी साधन और उपसाधनक़ी गुणवत्ता सही है और व्यवस्थित है,
हरेक भवनमें पेसेजकी चौडाई सही है,

सुरक्षाका प्रबंध सुचारु रुपसे है.
सुचारु अग्निशामक व्यवस्था
रखरखाव का कारोबार व्यवस्थित है,
वाहन पार्कींगकी व्यवस्था अव्यवस्थित नहीं है और अभी तो कोई क्षतियां दृष्टिगोचर नहीं होती है.
प्रत्येक प्रकारके भवनके जुथमें प्रर्यप्त वृक्ष और पुष्प पौधे है. उद्यानमें घांस भी है,
मार्गोंके दोनो दिशामें पर्याप्त वृक्ष और पौधे है.

महामार्ग पर सायकिलके लिये अतिरिक्त लेन है. चलनेके लिये भी पर्याप्त चौडी फुटपाथ है, गेस, विद्युत और पानीके लिये सुनिश्चित मार्ग (रुट) है,
छोटे बच्चोंके लिये क्रीडांगण है, युवाओंके लिये भी अतिरिक्त क्रीडांगण है,

टहेलने के लिये और जॉगींग़के लिये पर्याप्त मार्ग है,
व्यायाम गृह (जीम) और स्नानागार है,
वाचनालय है,
आराम गृह है,
क्लब है,
कोम्युनीटी ईतर प्रवृत्तियोंके लिये गृह है,
कोम्युनीटी भोज गृह है,
शोपींग सेंटर और डीपार्टमेंटल स्टोर्स है,

रखरखाव के लिये कार्यालय है जो शिकायतें लेते है और उसका निर्मूलन करते है,
सुव्यवस्थित कर्मचारीगण जो शिष्ट तरिके से संवाद करता है और शिघ्रतासे कार्य करते है.
विद्यालय है,
सीटी बसकी सुविधा है.
ऑटोरीक्षा स्टेंड है.
रास्ते पर दिशा सूचन करने वाले बॉर्ड है,
क्या क्या नहीं है यह बात नगरके आयुक्त (कमिश्नर) के दिमागके उपरकी बात है. यदि नगर आयुक्त (सीटी कमीश्नर) चाहता तो, जो अहमदाबादके जो क्षेत्र १९५२के बाद विकसित हुए, उनको गोदरेज गार्डन सीटी के समकक्ष कर सकता था. लेकिन ऐसी मानसिकता म्युनीसीपल कमीश्नरमे कहां हो सकती है.
स्थित तो ऐसी है कि सर्व प्रथम जनताको अनुभूति होती है कि “हमें फलाँ फलाँ समस्या है”. तत्पश्चात समाचार पत्रोंको अवगत होता है. ये समाचर पत्र अपने सीयासती एजंडाके आधार पर उसको प्रसिद्धि देते हैं. जब प्रश्न नगरसेवककी सभामें उठता है, तब कहीं नगरके आयुक्तको पता चलता है. कभी कभी तो नगरके आयुक्तको न्यायालय आदेश देता है तब नगर आयुक्त अपनी सेना को आदेश देता है. फिर काम होता है या तो नहीं होता है या तो आंशिक होता है या तो दोषपूर्ण काम होता है जो थोडे ही समयमें पूर्ववत स्थिति उत्पन्न करता है. फिर वही चक्र फिरसे चालु होता है.
तो क्या गोदरेज गार्डन सीटी गंदा और बदसुरत बन सकने के काबिल है?
क्रमशः
शिरीष मोहनलाल दवे
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