🌷जय श्री कृष्ण🌷
📢📣आइए, राधा और कृष्ण का एक संवाद देखें.. मुझे पूरा विश्वास है कि WhatsApp और Face Book के आज के दौर में यह संवाद आपने पहले पढ़ा ही होगा..
✍राधा और कृष्ण का एक संवाद ⬇
🏵️ कृष्ण राधा से पूछते हैं: “मेरी जगह कहां है ?” 🏵️
🏵️राधा जवाब देती है: “कान्हा, हर जगह तुम बसे हो, कण कण और क्षण क्षण में तुम बसे हो, हर जगह सिर्फ तुम ही तुम हो, कान्हा !! ” रधा आगे बताती है, “अगर तुम नहीं हो तो, वह एक ही बातमें नहि हो, कान्हा, तुम सिर्फ मेरे नसीब में नहीं नही हो.”
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✍यह संवाद को समझने का नम्र प्रयास⬇(मेसेजकी लम्बाइ बिना नापे कृपया पुरा पढना है)
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✍ कृष्ण और राधा के प्रेमकी परिभाषा और व्याख्या सबने अपनी-अपनी मानसिकता और क्षमता के मुताबिक की है.👨🎤👩🎤
🏵️राधा और कृष्ण का प्रेम कोई स्वार्थी प्रेम नहीं था. 💁♂️💁♀️राधा और कृष्ण का प्रेम शुद्ध प्रेम था❄️. दुन्यवी स्वार्थ और दुन्यवी मानासिकतासे उपर उठकर ऊनका प्रेम था. कुछ प्राप्त कर लेनेकी मानसिकता वह प्रेम में नहीं थी.
🏵️भौतिक और दुन्यवी स्वार्थ से मलिन हो चुका हो, ऐसा राधा और कृष्ण का प्रेम नहीं था..राधा और कृष्णका प्रेम शुद्ध था. अहेतुक प्रेम था.
🏵️जहां बिनस्वार्थी र्और शुद्ध प्रेम होता है, उसमें एक दूसरे के प्रति कोई अपेक्षा नहीं रहती है..
🏵️बिना हेतु और बगैर कोई अपेक्षा वह प्रेम होता है, जिसमें बस सिर्फ प्यार ही प्यार होता है ..
🏵️कृष्ण मुझे मिल जाए –अथवा- मैं कृष्णको प्राप्त कर लूं – या राधा मुजे मिल जाए – ऐसी कोई विचारधाराएं राधा या कृष्णमें थी ही नहीं. बिना कोई हेतु बस, सिर्फ प्यार ही प्यार था. इसलिये राधा ऐसा कहे कि, “कृष्ण मेरे नसीबमें नहीं है”; यह बात सरासर गलत है.❌
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🤹♂🤹♀ इस दुनिया में आकर हम साधारण लोगोंने प्रेमी-प्रेमिका के जिन जिन जोडें देखें हैं, या तो, प्रेमी-प्रेमिका के बारेमें जो कुछ समझ हमनें प्राप्त की है और फिल्मोमें दिखायें गयें प्रेमी युगलोंके नजरियेसे हम राधा और कृष्णकी तुलना करते हैं – उसी मर्यादित समझसे राधा और कृष्ण्को हम देखतें हैं
🏵️उसीके मुताबिक राधा और कृष्णके चित्र के साथ ऐसे संवाद रचाकर अपनी सर्जनात्मकता WhatsApp और Face Book के जरीये उत्साह्पूर्वक प्रकट करते हैं. या तो ऐसे मेसेज फोर्वर्ड करते हैं.
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☝कृपया गौर करें, थोड़ा सोचे.☝हम यह न समझ सके ऐसी जटिल है या कठिन बात है ही नही.🤹♂🤹♀
🏵️जैसे हम फिल्मों की स्टोरी में देखते हैं या तो दुन्यवी तौर पर एक प्रेमी-प्रेमिका व्यवहार करतें हैं, उसी लेवल पर जाकर राधा और कृष्ण का प्रेम कतई नहीं था. और ना ही राधा और कृष्ण के प्रेक को ऐसे समझा जा सकता है…फिल्मों वाली बात राधा और कृष्ण के प्रेम में थी ही नहीं. राधा और कृष्ण के प्रेमको समझनेके लिए अपनी मानसिकता थोडी बदलनी होगी – अपनी मानसिकताको विकसित करनी होगी.
☝✍राधा के नसीब में कृष्ण नहीं थे, लेकिन कृष्ण हर जगह और कण कण में है…यह बात तो सही है.
🏵️ लेकीन 🏵️
लेकीन – राधा के नसीब में कृष्ण नहीं थे; वह सोच या ऐसा अवलोकन हमारा खुद का हो सकता है. शुद्ध प्रेमकी व्याख्याको बिना समझे अपनी सोचको राधाकी सोच बताना गलत है. ऐसी अपनी गलत सोचको राधाकी सोचके रूपमें प्रदर्शित करना राधा-कृष्ण के शुद्ध प्रेम का अपमान जैसा है – जो हमारा किसीका ऐसा ईरादा हो ही नहिं सकता…
🌷✍ एक पुरुष एक स्त्री के प्रति जाति (स्त्री और पुरुष) का भेद होते हुए भी बिना कोई स्वार्थ रखे हुए, शुद्ध मनसे, उचित व्यवहार कर सकता है; और उसी तरह, एक स्त्री भी पुरुष के प्रति बिना किसी स्वार्थ से, अपना नजरिया ना बदल कर सीर्फ शुद्ध स्वरूप में कैसे स्नेह रख सकती हैं…उसका उत्तम उदाहरण राधा और कृष्ण है. ऐसी पवित्रता और प्रेम की उच्च परिभाषाके समान हम हिंदू राधा और कृष्ण को पूजते हैं – यह बहुत सरल है, फिर भी ऊंची बात है. बस सवाल हमारे नजरियेका हैं. कई लोग वि-जाति तो क्या, मामा-बुआके संतान, जो भाइ-बहन होते है उनके प्रति भी सही सोच नहीं रख सकते, ऐसे नजरियेवाले लोग हमारे धर्मके उच्चतम चरित्रोंको मजाक स्वरुप ना बना दे वह हमारी जिम्मेदारी है. और हमारी जिम्मेदारी का वहन हमें ही करना हैं.
✍कृष्ण का एक नाम ‘अच्युत’ है.
🏵️अच्युत का अर्थ : “जो चलायमान नहीं होता वह”.
🏵️पुरुष स्त्रीको को देखकर उसके प्रति अपने मन के भाव बदलने नहीं देता, दूसरे शब्दोंमें जो पुरुष चलायमान नहीं होता है वह. हम हिंदु वह तत्वको कृष्ण कहते है, पुजते है…
🙏 – नम्र निवेदन और एक दिली इच्छा भी – 🙏⬇
✍☝इसलिए ऐसे हमारे हिंदू धर्म के देवी देवताओं और भगवानों के संबंध में जो मैसेज होते हैं वह बहुत ही गलतफहमीपूर्ण फैलाये जाते हैं – कृपया ऐसे मैसेज को रोकना होगा.
✍☝अपने हिन्दु समाजकी विडंबना यह है कि अपने को भजनिक के रुपमें प्रस्तुत करनेवाले भी राधा-कृष्ण को गलत तरीकेसे बताते है. यह हमें थोडा सोच समझकर ऐसे मेसेजको फैलानेसे हमे अपने-आपको रोकना होगा. ☝
🌷कृष्ण नामक तत्व का जय हो
– जय श्री कृष्ण — पी. यु. ठक्कर🌷🏵️
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