तुम मानते हो लोग सब अपने है तुम्हारे,
पर लोग सब ये मानते है तुम्हे अपना ?
क्यों सामने से दौड़ कर जाते हो मिलनेको?
तुम चाहते हो ख़ुद यहाँ सस्तेमे क्यों खपना ?!
क्या सिध्ध कर लोगे सभीको खुश करके तुम?
क्या लोग कर देंगे शुरू तुम्हारे नामको जपना ?!
सब सच्चे दिलसे चाहते है ? कहेना मुश्किल है,
तुम चाहते हो क्यों ख़ुद ऐसी आगमे तपना ?!



