Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

विनोद काम्बली ने शारदाआश्रम विद्यामंदिर की ओर से सचिन तेंदुलकर के साथ 664 रन की साझेदारी की थी। वह पारी इसलिए भी सबसे बेहतरीन थी क्योंकि उस साझेदारी में विनोद काम्बली ने सबसे ज्यादा रन बनाए। कांबली के गेंदबाजी भी की थी और 6 विकेट भी लिए थे।

लेकिन इस मैच में दुस्साहस देखिये विनोद काम्बली इतने जिद्दी थे कि रमाकान्त आचरेकर चाहते थे कि कांबली और सचिन पारी की घोषणा जल्दी कर दें। ताकि दूसरी टीम को जल्दी आउट करके मैच जीता जा सके। यह किस्मत की बात थी कि सेंट जेवियर की टीम 146 पर जल्दी ही ऑल आउट हो गई। वरना ये मैच ड्रॉ की तरफ जाता।
जब सचिन तेंदुलकर ने कांबली से ऐसा कहा कि सर पारी की घोषणा के इशारा कर रहे तो कांबली ने कहा कि मेरा नाम ले लेना।
काम्बली थोड़ा अड़ियल किस्म के थे।
जैसे मैच प्रैक्टिस के दौरान वो फील्ड में पतंग उड़ाते हुए जाते थे। ऐसा करने का दुस्साहस सबमें नहीं होता।

योग्यता तो उनमें थी जिसने डेब्यू रणजी मैच की पहली गेंद पर छक्का लगा दिया। और एक बार शेनवॉर्न के एक ओवर में बाईस रन मार दिया था।

लेकिन खेल में अगर आपके पास निरंतरता और अनुशासन नहीं है तो आप फेलियर की तरफ बढ़ जाते हैं। तमाम दिग्गज खिलाड़ी ने यही कहते पाए गए कि कांबली केवल अनुशासन की वजह से मात खा गए।
वह सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के तीन साल बाद आए और चौबीस साल की उम्र में आखिरी टेस्ट मैच खेला।
नौ बार ODI टीम में वापस आए लेकिन बार बार असलफल रहे। उनको सोना पहनने का बड़ा शौक था और एक अजीब बात थी कि वो अपने बल्ले को मुठिया बहुत मोटी रखते थे। बताते हैं वो नौ नौ ग्रिप लगाते थे।

विनोद काम्बली एक बड़ा उदाहरण हैं कि  कैसे एक प्रतिभावान खिलाड़ी में अनुशासन की कमी ने क्या से क्या कर दिया। और एक साथी खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर जो उनके साथ खेलकर कहां से कहां पहुंच गया।
यह उसी 664 रन की पारी के बाद का फोटो है। जिसमें कांबली और सचिन अपनी स्कूल टीचर रागिनी देसाई के साथ खड़े हैं।
#VinodKambli

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Author:

Auther 8369123935

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