13. यदि परीक्षाएं न होती …
પ્રશ્ન / વિષયવસ્તુ:
बार-बार आनेवाली परीक्षाएं विद्यार्थियों की नाक में दम कर देती हैं। कसौटी परीक्षाओं तथा सत्रांत परीक्षाओं का सिलसिला छात्रों को चैन नहीं लेने देता। यदि ये परीक्षाएं न होती तो कितना अच्छा होता! सिर पर परीक्षाओं का बोझ न होता, तो बस आनंद ही आनंद रहता। मगर परीक्षाएं खत्म कर दी जाएं, तो फिर छात्रों की प्रगति की जानकारी कैसे मिलेगी? छात्र को अगली कक्षा में तरक्की किस आधार पर दी जाएगी? परीक्षाओं में रखा ही क्या है? सालभर की पढ़ाई का मूल्यांकन दो-तीन घंटों में कैसे हो सकता है? परीक्षाओं में सफल होनेवाले विद्यार्थियों में भी ज्ञान शायद ही दिखाई देता है। उन्हें मिली सफलता उनके ज्ञान और बुद्धि को नहीं, उनकी रटने की शक्ति को दर्शाती है। आज के विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी बन कर रह गए हैं। वे केवल परीक्षा में पास होने के लिए ही पड़ते हैं। कुछ तो बिना पढ़े, नकल करके या किन्हीं अन्य उपायों से भी सफल हो जाते हैं। इसलिए आधुनिक परीक्षाओं को ‘ज्ञान का दर्पण’ नहीं कहा जा सकता। लेकिन छात्र पढ़ाई के द्वारा जो ज्ञान प्राप्त करते हैं उसका पता बिना परीक्षा के कैसे चलेगा? परीक्षाओं को व्यर्थ ही इतना अधिक महत्त्व दिया जाता है। बच्चों की पढ़ाई के पोछे मा-बाप की नींद हराम हो जाती है। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मां-बाप खुद उन्हें पढ़ाने में जुटे रहते हैं। उनके लिए ट्यूशन की व्यवस्था करने में खूब खर्च करते हैं। यदि परीक्षाएँ न होती, तो अभिभावकों को बहुत राहत मिलती। इतना ही नहीं, परीक्षकों को भी उत्तर-पुस्तिकाएं जांचने में अपनी आँखें न फोडनी पड़तीं। लेकिन परीक्षाओं की झंझट न होती, तो कोई भला पढ़ता ही क्यों?यदि परीक्षाएं न होती तो विद्यार्थियों को महंगी मार्गदर्शिकाएं या गाइडें खरीदनी न पड़ती। फिर तो वे ‘अपेक्षित प्रश्नसंग्रह’ या महत्त्व के प्रश्नों (Important Questions) के पीछे न भागते। कोचिंग क्लासों में अपना समय और रुपया बरबाद करने से भी बच जाते! परीक्षा पद्धति भले ही कुछ हद तक दोषपूर्ण हो, पर विद्यार्थी को अगली कक्षा में ले जाने के लिए उसकी क्षमता तो परखनी ही पड़ेगी। इसलिए परीक्षाएं कभी बंद नहीं हो सकतीं। मनोरंजन के लिए हम भले हो ऐसी कल्पना कर लें, पर विद्यार्थियों के लिए परीक्षाएँ आवश्यक हैं। परीक्षाओं के अभाव में बुद्धिमान विद्यार्थियों का पता कैसे लगेगा? परीक्षाओं का होना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी है।