9. बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ
પ્રશ્ન / વિષયવસ્તુ:
भारत के सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए हमारे वर्तमान लोकप्रिय प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्रभाई मोदी ने सत्तासीन होने पर यह नारा दिया – बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। पिछले कई दशकों में भारत में स्त्री-पुरुष की संख्या का अनुपात जिस तेजी से विषम हुआ है, यह स्थिति पूरे उत्तर और मध्य भारत की है। पंजाब, हरियाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात तथा मध्य प्रदेश में जन्मदर में बालिकाओं का अनुपात घटा है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी मानसिकता है, जो बालिका के जन्म को भार समझती है। स्त्री गर्भ का भ्रूण परीक्षण करवाकर उसे नष्ट कराने का उपक्रम सामान्य जन द्वारा निकट अतीत में हो रहा है। परिणामस्वरूप आज स्त्रियों की जनसंख्या में कमी आई है। इसी को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री ने हरियाणा से इस आंदोलन का शुभारंभ किया। प्रसिद्ध सिनेतारिका माधुरी दीक्षित इसकी ब्रांड अंबेसडर हैं। बेटी बचाओ के संदर्भ गर्भवती महिलाओं का उचित पोषक खुराक और डॉक्टरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ग्राम स्तर से शुरू करके जिला स्तर पर इसकी देखरेख की जा रही है। बालिकाओं की जन्मदर में होनेवाली कमी को रोकने तथा उनके जन्म को प्रोत्साहित करके ‘बेटी बचाओ’ का कार्यक्रम पूरा किया। जा सकता। साथ ‘बचाओ’ के अंतर्गत उसके उत्तम लालन-पालन, शिक्षा व्यवस्था को भी शामिल किया गया है। उनके पालन-पोषण में लिंग संबंधी भेदभाव न हो, इसका भी ध्यान रखना है। यह छोटी-सी पहल, एक बहुत बड़े परिवर्तन का आगज है। ‘बेटी पढ़ाओ’ रूढिगत मानसिकता पर प्रहार है जो बेटी को केवल चूल्हा-चौके तक सीमित करने की हिमायत करती है। बालिकाओं को शिक्षा सुचारु ढंग से दी जाए ताकि उनका व्यक्तित्व सर्वांगीण विकास हो और वे समाज तथा देश के नवनिर्माण में नये सिरे से जुट जाएँ। भारतीय युवती जीवन के हर क्षेत्र में आगे निकलने को तत्पर है। उसको उच्च शिक्षा मिले तो. वह राज्य तथा देश के लिए नीति निर्धारण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकती है। आइए, हम सब मिलकर यह शपथ लें कि भ्रूण का परीक्षण नहीं करवायेंगे, न ही स्त्री भ्रूण का गर्भपात करवाएँगे। उसका लालनपालन अच्छी तरह करके, उसे यथाशक्ति उत्तम शिक्षा दिलायेंगे। उसके सर्वांगीण विकास के लिए सदा प्रयत्नशील रहेंगे। तब प्रधानमंत्री का यह नारा सार्थक होगा और देश की सामाजिक कुरीतियों का विनाश होगा।