8. स्वच्छ भारत – स्वस्थ भारत
પ્રશ્ન / વિષયવસ્તુ:
गंदगी रोगों की जन्मदात्री है, यह सभी समझदार व्यक्तियों को मालूम है। इसके विरुद्ध स्वच्छता हमें अनेक रोगों से बचाती है। हर युग में समाज सुधारकों ने स्वच्छता पर बल दिया है। हमारे वर्तमान लोकप्रिय प्रधानमंत्री जीने स्वच्छता अभियान को एक आंदोलन का रूप दिया है, जिसका नाम है – स्वच्छ भारत – स्वस्थ भारत। निकट अतीत में गांधीजी ने रचनात्मक कार्यक्रम में आजादी के पूर्व स्वच्छता आंदोलन का प्रसार किया था, उसी से प्रभावित है, यह नारा। अपने घर-गाँव-शहर के साथ सार्वजनिक स्थानों की सफाई के लिए भी सबको प्रोत्साहित किया है। गाँवों में खुले में शौच न करने के लिए केवल बातें ही नहीं कीं अपितु गाँव-गाँव में घर-घर में शौचालय बनवाने के लिए हर व्यक्ति को पूर्ण आर्थिक सहायता प्रदान की है। इससे खुले में शौच जाना महद् अंश तक रूका है, वातावरण को स्वच्छ बनाने में मदद मिली है। गंगा की सफाई का महाभियान चल रहा है, तो समुद्र तथा पर्वतों से कचरे को हटाने का अभियान भी जोरों पर है। ये अभियान केवल सरकार नहीं चला रही अपितु समग्र निवासी इसमें शामिल हैं। इन्हें प्रोत्साहित करने का काम हमारे लोकप्रिय खिलाड़ी, नेता, अभिनेता, बुद्धिजीवी सभी कर रहे हैं। एवरेस्ट पर्वत शिखर के सफाई का अभियान का एक चरण अभी पूरा हुआ है। इसी तरह गंगा ही नहीं, अपितु अन्य नदियों की सफाई में भी लोग लगे हैं। जल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कल-कारखानों द्वारा छोड़े जानेवाले प्रदूषित जल को शुद्ध करने की व्यवस्था की जा रही है, किन्तु अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि औद्योगिक इकाइयों इसमें पूर्ण सहयोग नहीं कर रही हैं। अभी-अभी पता चला है कि औद्योगिक प्रदूषित जल से भोपाल के आसपास की भूमि भी प्रदूषित हो चुकी हैं। इनमें उगनेवाली सब्जियाँ भी प्रदूषित हैं और गंभीर रोगों का कारण बन रही हैं। यही दशा सभी बड़े नगरों के आस-पास के गाँवों की है। पीने तथा इस्तेमाल के लिए स्वच्छ जल की व्यवस्था एक भगीरथ कार्य है। हवा-पानी-भूमि के प्रदूषण के कारण जनस्वास्थ्य के सम्मुख भयंकर खतरे उपस्थित हैं। इस कारण इन्हें दूर करने, रोकने तथा कम करने की और सबका ध्यान गया है। स्वास्थ्य के लिए यह एक गंभीर चुनौती है। बढ़ते शहरीकरण ने शहरों के अंदर तथा आसपास मलिन बस्तियों का प्रसार किया है, जिनमें जीवन के लिए आवश्यक सुविधाओं – हवा, पानी, सड़क आदि का अभाव है। इस तरह के आवासीय प्रदूषण से वहाँ रहनेवाले गरीब लोगों का स्वास्थ्य-स्तर गिरा है साथ ही शहरों में प्रदूषण भी बढ़ा है। इनमें भी सुधार की अत्यंत जरूरत है। शहरों में दोपहिए तथा चार पहियेवाले वाहनों की संख्या में वृद्धि तेजी से हुई है, जिससे वायु प्रदूषण के साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा है। ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण बहरेपन का खतरा भी दिखाई दे रहा है। समग्रतया देखें तो जल, वायु, भूमि के प्रदूषण को रोकने पर ही स्वच्छता हो सकती है। स्वच्छ वातावरण अच्छे स्वास्थ्य की अनिवार्य शर्त है, यह हमें भूलना नहीं चाहिए। ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क वास करता है।’