1. गुजरात का नवरात्रि महोत्सव – गरबा
પ્રશ્ન / વિષયવસ્તુ:
भारत एक बिन सांप्रदायिक राष्ट्र है। यहाँ हर धर्म, संप्रदाय और जाति के लोग अपने-अपने तीज-त्यौहारों को बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। इसीलिए भारत को त्यौहारों का देश कहा जाता है। यहाँ हर वार एक त्यौहार है। हमारे देश में कई प्रकार के त्यौहार मनाए जाते हैं जैसे धार्मिक, सामाजिक, राष्ट्रीय आदि। गुजरात का गरबा महोत्सव एक धार्मिक त्यौहार है।यह त्यौहार शरद ऋतु के मोहक वातावरण में आश्विन शुक्ल मास में धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता है। नवरात्रि नौ रातों में मनाया जानेवाला त्यौहार है इसीलिए इसे नवरात्रि कहते हैं। नौ दिनों तक लोग रात को गरबा गाते हैं और इसके दसवें दिन विजया दशमी मनाते हैं। इस त्यौहार को इसलिए मनाते हैं, कि माता रानी अम्बा ने इस दिन अत्याचारी महिसासुर का वध किया था। नौ दिनों तक इनके बीच युद्ध चला और दसवें दिन अत्याचारी महिसासुर का संहार करके अत्याचार का अंत किया। इसीलिए हर वर्ष यह नवरात्रि महोत्सव मनाया जाता है।। भारत के कई राज्य अपने-अपने लोकनृत्यों के लिए प्रसिद्ध हैं ‘जैसे पंजाब का भांगड़ा नृत्य, असम का ‘बिहु नृत्य, राजस्थान का घूमर, घेर इसी प्रकार गुजरात का लोकनृत्य गरबा न केवल गुजरात और भारत बल्कि समग्र विश्वभर में विख्यात है। लोग अपने-अपने गली-मुहल्ले में एकत्रित होकर गोलाकार रूप में गरबा नृत्य करते हैं और अपनी-अपनी मस्ती में तनमय होकर झूमने लगते हैं। भक्ति और संगीत का एक अद्भुत समाँ बन जाता है। एक और गायक अपनी मस्ती में माताजी के भजन गाता है तो दूसरी ओर भक्तजन उसी ताल और लय में झूमने लगते हैं। बीच में माताजी की गरबी रखी जाती है और उसी के आस-पास गोलाकार रूप में भक्तिरस में डूबकर गाते और झूमते हैं। गरबा लोक नृत्य आरंभ होने से पहले और पूर्ण होने के बाद आरती की जाती है। यह क्रम नौ दिन तक चलता है। दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है। गुजरात में इस दिन फाफड़ा और जलेबी खाते हैं। दशहरा और नवरात्रि दोनों असत्य पर सत्य की, अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक हैं। आधुनिक समय में गरबा के मूल स्वरूप में परिवर्तन हुआ है। गरबा के गीत (गरबी) माताजी से जुड़े हुए नहीं रहे, बल्कि उनमें समसामयिक विषयों का भी समावेश हुआ है। समसामयिक घटनाएँ भी इन गीतों में बुन ली जाती हैं। नृत्य पर भी आधुनिकता का प्रभाव दिखलाई देता है। अब गरबा मुहल्ले और सोसायटियों से निकलकर बड़े-बड़े क्लबों तक पहुँच गया है। इनमें भक्ति का स्थान मनोरंजन, प्रदर्शन लेता जा रहा है, जो एक दुःखद स्थिति है। गरबा महोत्सव की एक सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस लोक उत्सव में सब लोग अमीर-गरीब, ऊँच-नीच तथा जाति-पाति का भेद-भाव भूलकर एकमात्र भक्ति और प्रेम रस में डूब जाते हैं। अर्थात् यह महोत्सव परस्पर प्रेम एकता और भाईचारे की भावना बढ़ानेवाला त्यौहार हैं। यह त्यौहार विजय का त्यौहार है। हम जीवन में हर क्षेत्र में विजयी बनें और धर्म, न्याय तथा मानवता की रक्षा करें ऐसा संदेश देता है। निःसंदेह गुजरात का गरबा महोत्सव सबसे अनूठा और अद्वितीय त्यौहार हैं। इसमें कोई संदेह नहीं।