વાર્તા

भीड़ के लोगों का एक आदमी पर पत्थर फेंकना – एक महात्मा का आना-लोगों द्वारा उस व्यक्ति के पापों की शिकायतमहात्मा से न्याय की...

हिंदी Std 9-12
પ્રશ્ન / વિષયવસ્તુ:
नीचे दिए गए विषय पर आधारित एक कहानी लिखें और उसे उपयुक्त शीर्षक दें।

भीड़ के लोगों का एक आदमी पर पत्थर फेंकना – एक महात्मा का आना-लोगों द्वारा उस व्यक्ति के पापों की शिकायतमहात्मा से न्याय की मांग- महात्मा का न्याय – “ठीक है, पत्थर मारो, पर पहला पत्थर वह उठाए जो पूर्ण निष्पाप हो”-किसी का आगे न बढ़ना-भीड़ का चुप रहना – महात्मा का उपदेश – बोध।

उत्तर :

महात्मा का न्याय

    एक दिन सबेरे रामपुर की बड़ी सड़क पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हुई थी। सभी लोग बीच में खड़े एक आदमी पर पत्थर फेंक रहे थे। कई लोग उसे भला-बुरा भी कह रहे थे। बहुत कोलाहल हो रहा था। वह आदमी किसी तरह अपने आपको बचाने की कोशिश कर रहा था।

    संयोगवश उधर से एक बड़े महात्मा गुजरे। लोगों में उनका बहुत सम्मान था। महात्मा भीड़ और कोलाहल देखकर ज्यों ही ठहरे कि लोग उनसे उस आदमी के पापों की शिकायत करने लगे। किसी ने कहा, ‘यह बड़ा पापी है।’ दूसरे ने कहा, ‘यह चोर है, उसे सजा देनी चाहिए।’ तब तीसरा बोला, ‘यह अधर्मी है, इसे दंड दो।’ इतने में कुछ लोग महात्मा से बिनती करने लगे, ‘आप ही न्याय कीजिए। इसे क्या दंड देना चाहिए?’

    सबकी बातें शांति से सुनकर महात्मा ने कहा, “ठहरो, मैं न्याय करता हूँ। यह पापी है, अधर्मी है। इसे दंड देना ही चाहिए। ठीक है, पत्थर मारो, पर पहला पत्थर वही उठाए जो पूर्ण निष्पाप हो, और किसी को उसे पत्थर मारने का अधिकार नहीं।” महात्मा की बात सुनकर भीड़ बिलकुल चुप हो गई। कोई एक कदम भी आगे न बढ़ा। ऐसा कौन है, जो पूर्ण निष्पाप हो? फिर महात्मा ने धीरे से कहा, “सुनो भाइयो, इस दुनिया में छोटे-मोटे पाप तो सभी करते हैं। हमें पापियों को दंड देने के बजाय उन्हें प्रेम से सुधारना चाहिए।”

    महात्मा ने उस आदमी को उपदेश देकर विदा किया। महात्मा के व्यवहार और उपदेश का लोगों पर बहुत प्रभाव पड़ा।

बोध (सीख) : दूसरे को दंड देने से पहले अपने व्यवहार की ओर भी देखना चाहिए। अथवा हमें किसी को दंड देने का अधिकार नहीं है, अगर हो सके तो भूल करनेवाले को क्षमा कर देना चाहिए।

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