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बिज़नेस स्टैंडर्ड

2 अक्टूबर को शेयर बाजार में छुट्टी; अब सोमवार को होगी ट्रेडिंग, अगले हफ्ते इन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर

Stock Market Holiday: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को खत्म हफ्ते में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट दर्ज की गई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले दिनों में कच्चे तेल, रुपये और विदेशी निवेशकों की चाल से ही बाजार की अगली दिशा तय होगी।

Stock Market Holiday Today

प्रतिकात्मक फोटो

Last Updated: अक्टूबर 2, 2026 | 7:35 AM IST

Stock Market Holiday: भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के मौके पर बंद रहेगा। इस दिन बीएसई और एनएसई पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और करेंसी डेरिवेटिव्स में कारोबार नहीं होगा। इसके अलावा कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स पर भी ट्रेडिंग बंद रहेगी। अब घरेलू बाजार में अगला कारोबार सोमवार 5 अक्टूबर को होगा।

छुट्टी से पहले गुरुवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 571 अंक यानी 0.8 फीसदी गिरकर 71,910 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 करीब 199 अंक यानी 0.9 फीसदी टूटकर 22,422 के स्तर पर बंद हुआ।

महंगे क्रूड और कमजोर रुपये ने बिगाड़ा बाजार का मूड

SBI सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (फंडामेंटल रिसर्च) सनी अग्रवाल के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार 8वें हफ्ते जारी रहा, जो करीब 25 साल में सबसे लंबी वीकली गिरावट है। मौजूदा गिरावट कोविड के दौरान आई सात हफ्तों की गिरावट से भी ज्यादा लंबी हो गई है। तेज गिरावट के चलते बेंचमार्क इंडेक्स 2026 के सबसे निचले स्तर पर फिसल गए हैं।

उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव बना हुआ है। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड करीब 5.3 फीसदी पर बनी हुई है, जबकि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

एनरिच मनी के CEO  पोनमुडी आर ने भी कहा कि कच्चे तेल की तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। रुपया 96.20 प्रति डॉलर के पार चला गया, जिससे भारत के लिए तेल आयात महंगा हो सकता है और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव

गुरुवार को सिर्फ लार्जकैप शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स 1-1 फीसदी से ज्यादा टूटा। सेक्टोरल परफॉर्मेंस पर नजर डालें तो ऑटो, रियल्टी, मेटल, पावर और FMCG सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली रही।

हालांकि, IT सेक्टर बाजार में मजबूती दिखाने वाला अकेला सेक्टर रहा। इसकी वजह अमेरिकी IT कंपनी एक्सेंचर के बेहतर नतीजे रहे। एक्सेंचर की वित्त वर्ष 2027 के लिए 3 से 6 फीसदी रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस ने IT सेक्टर को सहारा दिया। 

इसके बाद भारतीय IT कंपनियों के अमेरिकी ADR में तेजी आई। इंफोसिस का ADR करीब 8.13 फीसदी और विप्रो का ADR करीब 7.88 फीसदी चढ़ा। निफ्टी IT इंडेक्स सवा दो फीसदी चढ़कर बंद हुआ। 

आगे बाजार की कहां रहेगी नजर?

फंडामेंटल के लिहाज से निवेशकों की नजर अब कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर तेल की कीमतों में नरमी आती है, रुपये में स्थिरता दिखती है और FII की बिकवाली कम होती है तो बाजार में रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है। वहीं, IT सेक्टर में एक्सेंचर के नतीजों के बाद निवेशकों की नजर भारतीय IT कंपनियों की मांग और कमाई के संकेतों पर रहेगी।

निफ्टी के लिए 22,200 अहम सपोर्ट

टेक्निकल लेवल पर एनरिच मनी के मुताबिक निफ्टी गुरुवार को 22,600 से 22,550 के सपोर्ट जोन के नीचे फिसल गया। दिन के निचले स्तर पर इंडेक्स करीब 22,218 तक पहुंचा, लेकिन बाद में 22,400 के ऊपर संभला।

निफ्टी के लिए अब 22,200 का स्तर अहम सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 22,000 की ओर जा सकता है। ऊपर की तरफ 22,550 से 22,600 पहला रेजिस्टेंस जोन है। इसके बाद 22,800 से 23,000 का स्तर बड़ी रुकावट रहेगा।

RSI करीब 23 पर है, जो बताता है कि निफ्टी काफी ज्यादा बिकवाली वाले जोन में पहुंच चुका है। हालांकि, MACD अभी भी कमजोरी का संकेत दे रहा है। ऑप्शन डेटा में 22,700 से 23,000 के बीच कॉल ऑप्शन की ज्यादा पोजीशन है, जिससे इस रेंज में दबाव बना रह सकता है।

बैंक निफ्टी में 54,000 का स्तर अहम

बैंक निफ्टी ने भी गुरुवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार किया। शुरुआत में इंडेक्स 55,000 से 55,100 के जोन तक पहुंचा, लेकिन बाद में बिकवाली के कारण 54,000 के पास आ गया।

बैंक निफ्टी के लिए 54,400 का स्तर पहला सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स 54,000 से 53,800 तक फिसल सकता है। ऊपर की तरफ 55,000 से 55,100 का स्तर बड़ी रुकावट है। इसके ऊपर टिकने पर रिकवरी 55,300 से 55,500 तक बढ़ सकती है। फिलहाल बाजार में कमजोरी बनी हुई है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल, रुपये और विदेशी निवेशकों की चाल से ही बाजार की अगली दिशा तय होगी।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज/एक्सपर्ट की है। बिजनेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता। निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने और जरूरत पड़ने पर निवेश सलाहकार की मदद लेने की सलाह दी जाती है।) 

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