Bhagavad Geeta Shloka
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Bhagavad Gita: Chapter 04, Verse 06
अजोपि सनुल्ययात्मा भूतानामीश्वरोपि सन् ।
प्रकृति स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया ॥
कृष्ण अपने रूप अपने अस्तित्व को समझाते हुए कह रहे हैं मैं अजमा हूँ। यानी मेरा कभी जन्म नहीं हुआ मैं अविनाशी हूँ अर्थात मेरा कभी नाश नहीं हो सकता। मैं समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योग माया से प्रकट होता हूँ। जिसका जन्म होता है, उसकी मृत्यु निश्चित है। तो जिसे अर्जुन देख रहा था वो क्या था? क्योंकि वो तो कभी जन्मे ही नहीं।



