Bhagavad Geeta Shloka
daily inspiration and tips to supercharge your mind.
Bhagavad Gita: Chapter 05, Verse 05
यत्साङ्ख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्यौगैरपि गम्यते ।
एकं साङ्ख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति ॥
कृष्ण अर्जुन को कर्म योग की अहमियत को समझाते हुए कहते हैं। की सन्यास का अर्थ है। अगर ज्ञान योग में भी कर्म योग का सहारा लोगे। तभी तुम दुनिया के पचड़ों से ऊपर उठ के और सच्चाई को जान पाओगे। और अगर तुम्हे सच्चाई को जानना है तो अपने आप को कर्तापन यानि की अहंकार जैसे की मैं हूँ मैं ही करता हूँ। इसे छोड़ना होगा और इसे कैसे छोड़ा जाए। अपनी इंद्रियों को वश में करके।



